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23 फ़रवरी, 2012

भारत की बढ़ती शक्ति का दुनिया में स्वागत

एशिया की दो बड़ी शक्तियों भारत और चीन के बीच मौजूदा परिस्थितियों में हर क्षेत्र में प्रतिदंद्विता है. कई मामलों में चीन को भारत से आगे माना जाता है.लेकिन एक चीनी सेवानिवृत्त अधिकारी ने अपने लेख में दो टूक शब्दों में चीन को भारत से पाँच अहम सीख लेने की हिदायत दे डाली है.

हिंदू अख़बार में छपी रिपोर्ट के मुताबिक सॉंग जॉंगपिंग ने अपने लिख में कहा है कि भारत की तरह चीन को अपने यहाँ धार्मिक मान्यताओं और लोकतंत्र को बढ़ावा देना चाहिए, संतुलित आर्थिक विकास करना चाहिए और कूटनीति और सॉफ़्ट पावर पर ज़ोर देना चाहिए.

सॉंग जॉंगपिंग चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी में अधिकारी थे और अब वरिष्ठ सैन्य रणनीतिकार हैं.उनका लेख फ़िनिक्स टेलीवीज़न की वेबसाइट पर छपा है और इसे दो लाख 50 हज़ार लोग पढ़ चुके हैं. इस लेख ने चीन में ऑनलाइन पाठकों की बीच बहस छेड़ दी है.

'चाइना शुड बी हंबल और लर्न फ़्रॉम इंडिया' नाम के इस लेख में सॉंग जॉंगपिंग ने लिखा है कि चीन के लिए पहली सीख है कि कैसे भारत धार्मिक मान्यताओं को बढ़ावा देता है.

वे लिखते है, "चीन में पैसे को ही लोग एकमात्र लक्ष्य मानते हैं, हमारा देश आर्थिक विकास को ही प्राथमिकता देता है...बाकी चीज़ों को रास्ते से हटना पड़ता है. नतीजा ये है कि हम नैतिक रूप से कंगाल हो चुके हैं." उनका कहना है, "साउथ चाइन सी में चीन के पड़ोसी देशों के साथ कई विवाद हैं. जबकि भारतीय उपमहाद्वीप में भारत की बढ़ती मौजूदगी को बेहतर नज़रिए से देखा जा रहा है."सॉंग जॉंगपिंग का मानना है कि एक ओर भारत अपनी नौसेना का आधुनीकिकरण कर रहा है वहीं चीन में गति धीमी है. उनका कहना है कि कूटनीति और सॉफ़्ट पावर को लेकर चीन भारत से बहुत कुछ सीख सकता है.


'भारत से ख़ुश तो चीन से डरती है दुनिया'

अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने की भारतीय नीति के भी सॉंग जॉंगपिंग कायल नज़र आते हैं.उन्होंने लेख में कहा है, "भारत ने सुनिश्चित किया है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका मज़बूत दावा रहे, जिसे चीन दक्षिणी तिब्बत कहता है. लेकिन चीन ने इस क्षेत्र के 90 हज़ार वर्ग किलोमीटर इलाके पर नियंत्रण खो दिया है." दूसरे देशों में अपनी शक्ति प्रदर्शन के भारतीय तरीके और नौसेना पर ध्यान देने की नीति की भी चीनी रणनीतिकार ने तारीफ़ की है. उनका कहना है, "साउथ चाइन सी में चीन के पड़ोसी देशों के साथ कई विवाद हैं. जबकि भारतीय उपमहाद्वीप में भारत की बढ़ती मौजूदगी को बेहतर नज़रिए से देखा जा रहा है."

सॉंग जॉंगपिंग का मानना है कि एक ओर भारत अपनी नौसेना का आधुनीकिकरण कर रहा है वहीं चीन में गति धीमी है. उनका कहना है कि कूटनीति और सॉफ़्ट पावर को लेकर चीन भारत से बहुत कुछ सीख सकता है. अपने लेख में वे कहते हैं, "दुनिया भारत की बढ़ती शक्ति का स्वागत कर रहा है" जबकि चीन के विकास को डर की दृष्टि से देखता है. भारत के लोकत्रांतिक मूल्यों के कारण दुनिया भारत को सकारात्मक नज़रिए से देख रही है. अगर चीन को भी पश्चिमी देशों से दोस्ताना व्यवहार रखना है तो उसे भी यही मूल्य अपनाने होंगे."

28 जनवरी, 2012

पुरवा सुहानी आई रे....

आज माघ शुक्ल की पंचम तिथि यानी बसंत-पंचमी है, बसंत  पंचमी के आते  ही  बसंत  ऋतु का शुभारंभ हो जाता है  . बसंत ऋतु को ऋतुओं का राजा माना जाता है क्योकि इस मौसम में रंग बिरंगे फूल खिलने से बागों में बहार आ जाती है .खेतों में सरसों के पीले पीले फूल खिलने से किसानों का दिल भी खिल जाता है . आम के पेड़ों में बौर आ जाते है . पतझड़ भी शुरू हो जायेगा लेकिन वृक्षों में नई-नई पत्तियां भी आ जायेगीं . पतझड़ के बाद बसंत यह प्रकृति की विचित्र लीला है .बसंत ऋतु में फिल्म पूरब-पश्चिम का गीत " पुरवा सुहानी आई रे पुरवा ...... " की याद बरबस ही आ जाती है .बसंत-पंचमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाओं के साथ आईये आप भी इस गीत का आनंद लीजिये ----  
 

25 जनवरी, 2012

गणतंत्र दिवस अमर रहे


उत्तराखंड के लंबे प्रवास के बाद मै आज ही लौटा हूँ . सर्वर की समस्या के कारण पिछले कई दिनों से पोस्ट लगाना संभव नहीं था . हालाँकि प्रवास के दौरान अनेक ऐसे अनेक प्रसंग आये जिससे ग्राम चौपाल सुसज्जित हो सकती थी लेकिन समुद्र तल से 2500-3000 फीट की उचाई से लिख पाना संभव भी नहीं था . भारी बर्फबारी , बरसात और शीत लहर में रजाई , कंबल और स्वेटर से ठण्ड भी नहीं मिटती थी . वहां के अखबारों ने इस ठण्ड को हाड़ कपने वाला तहद निरुपित किया था . इस साल की ठण्ड और बर्फबारी ने कई वर्षों का रिकार्ड तोडा है .इस स्थिति में की-बोर्ड पर उंगलियाँ चलाना भी दुष्कर था . कंप्यूटर  की स्पीड भी इतनी धीमी थी की लिखना मुमकिन नहीं था . आगे की पोस्ट में आपको संस्मरण से वाकिफ करने की कोशिश करूँगा .
आप सबको गणतंत्र दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं  

18 जनवरी, 2012

चीन का झांसा


भारत और चीन ने हिमालय की विवादास्पद सीमा पर शांति बनाए रखने के लिए एक पैनल बनाया है. हिमालय की यही सीमा भारत और चीन के बीच 1962 में युद्ध का कारण बनी थी.

साढ़े तीन हजार किलोमीटर लंबी सीमा पर शांति के लिए पैनल बनाने का फैसला आज 15वीं बार हुई बैठक में लिया गया. राष्ट्रीय सुरक्षा सचिव शिवशंकर मेनन और चीनी स्टेट काउंसलर दाई बिंगुओ के बीच यह बातचीत नई दिल्ली में हुई. समझौते के तहत  भारत चीन के सीमाई इलाकों में शांति बनाए रखने के लिए एक सिस्टम बनाया जाएगा जो अहम सीमाई मुद्दों को सुलझाएगा.

इसका यह अर्थ नहीं लगाया जाना चाहिए की चीन अपने पुराने रवैये से पीछे हट रहा है . चीन आज दुनिया के सबसे ताकतवर देश  बनने का ख्वाब देख रहा है .इस स्थिति में  वह भारत से अपनी पुरानी दुश्मनी को ख़त्म करने के लिए कदापि तैयार नहीं होगा अतः भारत को चीन के झांसे में नहीं आना चाहिए .