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26 जनवरी, 2011

छत्तीसगढ़ में नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा " 108 संजीवनी एक्सप्रेस " शुरू





छत्तीसगढ़ में नि:शुल्क एम्बुलेंस सेवा '108 संजीवनी एक्सप्रेस '  शुरू हो गई है ,पहले चरण में 36 एम्बुलेंस की सेवाएं ली जा रही है. इनमें से  रायपुर जिले को  25 और बस्तर जिले को  11 एम्बुलेंस उपलब्ध कराये गए है  . इनमें एक-एक प्रशिक्षित तकनीशियन तैनात रहेंगे. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह एम्बुलेंस सेवा बिल्कुल नि:शुल्क रहेगी तथा घटना की खबर मिलते ही 30 मिनट के अन्दर घटना स्थल पर पंहुचेगी .कहने को तो यह एम्बुलेंस है लेकिन वास्तव में यह चलित-अस्पताल है क्योकि इसमें जीवन रक्षक दवाइयों के अलावा स्ट्रेचर ,कटर, आक्सीजन भी है.आवश्यक होने पर यह अग्नि शमन का भी काम करेगा . इस सेवा का लाभ लेने के लिए किसी भी कंपनी के मोबाईल अथवा लेंड -लाइन फोन  से 108  (वन जीरो एट )   नंबर डायल करना पड़ेगा ,एस.टी.डी. कोड की जरुरत नहीं है .वास्तव में यह कमाल की सेवा है ,दिनों-दिन बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं के कारण यह सेवा अति-आवश्यक हो गई थी .छत्तीसगढ़ सरकार और   इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीटयूट ( EMRI ) के संयुक्त प्रयास से संचालित इस योजना का लाभ अप्रेल माह से प्रदेश के सभी 18 जिले के लोगो को मिल सकेगा . दिनांक 25.01.2011  को छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने हरी झंडी दिखा कर सभी  एम्बुलेंस को रवाना किया . आज 26 जनवरी को अभनपुर के गणतंत्र दिवस समारोह में उपस्थित जन समुदाय के समक्ष   इसका प्रदर्शन किया गया . 

25 जनवरी, 2011

भारतीय गणतंत्र और तिरंगा


किसी भी नागरिक को अपने देश के  किसी भी भू-भाग में राष्ट्रीय  ध्वज  फहराने की स्वतंत्रता है। स्वतंत्र भारत का ध्वज तिरंगा है और इसे भारतीय गणतंत्र के किसी भी भू-भाग में फहराया जा सकता है यह विडंबना ही है कि भारत एक मात्र देश है जहॉं पर राष्ट्रीय पर्व के दिन ध्वज फहराने को लेकर विवाद उत्पन्न हो रहा है। विवाद उत्पन्न करने वाले लोग यह तर्क दे रहें हैं कि तिरंगा अगर फहराया गया तो कश्मीर में शांति भंग हो जायेगी। जिस तिरंगे की आन-बान और शान के लिए लाखों लोगों ने अपनी कुर्बानी दी तथा  अनेक वीर सपूत हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर लटक गये और जिस तिरंगे के बारे में यह कहा गया कि ----

शान न इसकी जाने पाये ,
चाहे जान भले ही जाये ,
विश्व विजय करके दिखलायें ,
तब होवे प्रण पूर्ण हमारा, 

झण्डा उँचा रहे हमारा ;

आज देश की राजनैतिक स्थिति ऐसी  हो गई है कि  भारत के मुकुट मणि कश्मीर में झण्डा फहराने से  रोका जा रहा है, कुछ  लोगों को इसमें आपत्ति है ,आपत्ति करने वाले लोग बड़े  शान से कह रहे हैं कि इससे शांति भंग होगी, न फहरायें। कभी तिरंगे को फहराना शान  की बात समझी जाती थी,  तो आज इन लोगों की नजर में तिरंगा न फहराना शान की बात समझी जा रही  है। जहॉं तक शांति भंग का सवाल है तो स्वतंत्रता आंदोलन के समय अंग्रेजी हुकूमत भी यही कहती थी कि आंदोलनकारियों के कारण शांति भंग हो रही है, देश में अराजकता फैल रही है। महात्मा गांधी तक को शांति भंग के आरोप में कई बार गिरफ्तार किया गया। जो लोग तिरंगा फहराने को लेकर आपत्तियां कर रहे हैं, उन्हें तिरंगे की आन-बान और शान की परवाह नहीं है। प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह एवं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अंग्रेजों की भाषा में बोल रहे हैं। 1947 के पहले जो बात अंग्रेज बोलते थे, वही बात आज हमारे प्रधानमंत्री और कश्मीर के मुख्यमंत्री बोल रहे हैं।
यह विचित्र  विडंबना है कि जिस कांग्रेस पार्टी के बैनर तले देश की आजादी की लड़ाई लड़ी गयी, केन्द्र में उसी कांग्रेस पार्टी की आज हुकूमत है।  1947 के पहले कांग्रेस  के नेता झण्डा फहराने  के लिए मरते थे और आज झण्डा फहराने वालों को मार रहे हैं, देश की जनता यह सब  देख रही है । केन्द्र सरकार ने तुष्टिकरण की नीति के चलते अलगाववादियों के सामने घुटने टेक दिए, देश की सीमा खतरे में है। उमर अब्दुल्ला ने आज तक कभी-भी कश्मीर के लाल चौंक  में पाकिस्तानी झण्डा फहराने वालों को नहीं रोका। भारत और भारतीयों के खिलाफ जगह-जगह वहॉं नारे लिखे गये, उसके बारे में कभी नहीं टोका। आज जब देश के नौजवान वहॉं तिरंगा फहराने की बात कर रहे हैं तो इनको आपत्ति हो रही है। युवाशक्ति के इस इरादे को भांपकर, बेहतर होता कि स्वयं प्रधानमंत्री डॉ0 मनमोहन सिंह यह कहते कि नौजवानों तुमको लाल चौंक जाने की जरूरत नहीं है, मैं स्वयं वहॉं जाकर तिरंगा फहराउंगा, तो शायद उनकी इज्जत में बढ़ोत्तरी होती, लेकिन तिरंगा फहराने वालों की आलोचना करके उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह सिद्ध कर दिया है कि वे कश्मीर को भारत का भू-भाग नहीं मानते।  इस घटनाक्रम से एक बात का खुलासा तो हो ही गया कि कौन  तिरंगे का  पक्षधर  है और कौन तिरंगे का विरोधी । जो लोग लालचौंक में तिरंगा फहराने का विरोध कर रहे हैं, उनमें और अलगाववादियों में फर्क क्या रह गया है ?
जहॉं तक कश्मीर समस्या का सवाल है, यह समस्या धारा 370 की वजह से उत्त्पन्न हुई है ,अगर पंडित नेहरू ने  सरदार वल्लभ भाई पटेल की बात मान ली होती तो आज कश्मीर की सूरत ही कुछ और होती ।आज कश्मीर की हालत यह हो गयी है कि समूचा राज्य अलगाववादियों के हवाले कर दिया गया है तथा दिल्ली की सरकार विवश और लाचार बन कर बैठी है ।  

आप सबको गणतंत्र दिवस की बहुत बहुत बधाई !

श्री ललित शर्मा सहित दो सुप्रसिद्द ब्लॉगरों का सम्मान



छत्तीसगढ़ राष्ट्रभाषा प्रचार समिति द्वारा आयोजित हम भारतीय सम्मेलन में देश के दो सुप्रसिद्द ब्लॉगरों को ब्लॉग गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। इसमें अभनपुर जैसे छोटे से कस्बे से अपनी ब्लॉग के माध्यम से देश-विदेश में लोकप्रिय श्री ललित शर्मा भी शामिल हैं । इस अवसर पर प्रख्यात लेखक एवं हिन्दी सेवी श्री कैलाशचन्द्र पन्त एवं अन्य अतिथियों ने ब्लॉग और इन्टरनेट के माध्यम से हिन्दी के वैश्विक प्रसार पर हो रहे कार्यों की सराहना  की ।समिति द्वारा  प्रख्यात हिन्दी सेवी श्री कैलाशचन्द्र पन्त का अमृत महोत्सव मनाया गया । इस अवसर पर ब्लॉगरों को भी विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था ।  समारोह में प्रदेश के औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष श्री बद्रीधर दीवान, विधायक श्री रामसुन्दर दास, पुलिस महानिदेशक एवं कवि श्री विश्वरंजन, पूर्व शिक्षामंत्री श्री सत्यनारायण शर्मा तथा वरिष्ठ साहित्यकारों  ने  कनाडा में  कार्य कर रहे सुप्रसिद्द ब्लॉगर श्री समीर लाल समीर तथा छत्त्तीसगढ़ के विश्व प्रसिद्ध लोकप्रिय ब्लॉगर श्री ललित शर्मा को "ब्लॉग गौरव सम्मान" प्रदान किया

21 जनवरी, 2011

चेहरा व चरित्र


एक दिन महान दार्शनिक सुकरात अपने शिष्यों के साथ बैठे थे। किसी गंभीर विषय पर चर्चा चल रही थी। तभी एक ज्योतिषी वहां आ पहुंचा, जो चेहरा देखकर चरित्र बताने के लिए मशहूर था।

पहले उसने गौर से सुकरात का चेहरा देखा, फिर उनके शिष्यों से बोला, "तुम लोगों ने इस व्यक्ति को अपना गुरु बनाया है, लेकिन इसका चरित्र बहुत गंदा है, क्योंकि इसके नथुनों की बनावट बता रही है कि यह क्रोधी है।"

इतना सुनते ही सुकरात के शिष्य ज्योतिषी को मारने दौड़े, लेकिन सुकरात ने उन्हें रोक दिया और कहा, "ये देह भाषा के ज्ञाता हैं, इन्हें बोलने दो।"उसके बाद ज्योतिषी तेज आवाज में बोला, "मैं सत्य को छिपाकर सत्य का अपमान नहीं करना चाहता, क्योंकि इस व्यक्ति के सिर की बनावट से पता चलता है कि यह अत्यधिक लालची है और थोड़ा सनकी भी। इसके होठों से मालूम होता है कि यह भविष्य में देशद्रोही निकलेगा।"

सुकरात मुस्कराते रहे। फिर उन्होंने उस ज्योतिषी को उपहार देकर इज्जत के साथ विदा किया। लेकिन एक शिष्य से रहा नहीं गया, उसने पूछ ही लिया, "गुरुदेव, वह आदमी लगातार बकवास करता रहा, फिर भी आपने उसे सम्मान दिया। मेरी तो समझ में कुछ भी नहीं आ रहा है।"

सुकरात गंभीर होकर बोले, "उस व्यक्ति ने बकवास नहीं की, बल्कि उसने मेरी देह भाषा पढ़ी है।"

यह सुनकर सारे शिष्य हैरत भरी नजरों से सुकरात को देखने लगे। फिर एक शिष्य ने पूछा, "यानी आप वैसा ही हैं जैसी आपकी देह भाषा है?"

सुकरात ने बिना संकोच के कहा, "हां, मैं वैसा ही हूं, लेकिन उसने मेरे विवेक पर ध्यान नहीं दिया, जिसकी शक्ति से मैं अपनी देह भाषा को कैद करके रखता हूं।"

इसलिए अपनी देह भाषा पर ध्यान दीजिए और नीचे लिखे गुरुमंत्रों को दिल में उतारिए    : ----


* किसी भी व्यक्ति की लोकप्रियता उसकी शक्ति से नहीं नापी जा सकती, बल्कि देह भाषा आपके व्यक्तित्व का आइना है और आइना कभी झूठ नहीं बोलता।

* अकेले रहने की आदत डालिए और एकांत से मिलने वाले लाभों को भुनाइए, क्योंकि वे लाभ आपको सफलता की ओर ले जाएंगे।

* यदि आपकी जेब में पैसा नहीं है, तब आप शहद की तरह मीठा बोलिए। गुस्से को पी जाइए और आगे बढ़ने का मार्ग खोजिए, क्योंकि यह देह भाषा का एक हिस्सा है, जो आपको बड़ा आदमी बनाएगा।

* बुरी आदतों में सुधार करने की बजाय, उन्हें छोड़ने की कोशिश करें, क्योंकि बुरी आदतें आपकी देह भाषा पर बुरा प्रभाव डालती हैं।

* सुनने में फुर्तीले, बोलने में सुस्त तथा क्रोध करने में अधिक सुस्त बनो। फिर सफलता के बंद दरवाजे अपने आप खुलने लगेंगे।

* बेईमान होने की अपेक्षा आपका गरीब होना ज्यादा अच्छा है, क्योंकि देह भाषा आपके बेईमान होने की पोल खोल देगी।

* श्रेष्ठता तब आती है, जब एक व्यक्ति दूसरों की तुलना में खुद अपने से ज्यादा सवाल पूछता है। फिर उसकी देह भाषा उसी के अनुसार बन जाती है।

* प्रतिष्ठा के बिना श्रेष्ठता आ सकती है, लेकिन बिना श्रेष्ठता के प्रतिष्ठा का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि प्रतिष्ठा ही मनुष्य को आगे बढ़ते रहने का रास्ता दिखाती है।

* देह भाषा में खुशामद का कोई महत्व नहीं है, लेकिन प्रशंसा का देह भाषा में बहुत महत्व है, क्योंकि प्रशंसा से देह भाषा में निखार आता है।
                                                                               *
* बीस वर्ष की आयु में व्यक्ति का जो चेहरा रहता है, वह प्रकृति की देन है, तीस वर्ष की आयु का चेहरा जिंदगी के उतार-चढ़ाव की देन है लेकिन पचास वर्ष की आयु का चेहरा व्यक्ति की अपनी कमाई है। - अष्टावक्र