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21 नवंबर, 2011

क्या बच पायेगा हिमालय का ग्लेशियर ?

ग्लेशियर बचाने भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश का संयुक्त मोर्चा 
 एवरेस्ट 
वैज्ञानिक रूप से यह बात अब प्रमाणित हो चुकी है कि पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम चक्र में आश्चर्यजनक ढंग से आये परिवर्तन के कारण हिमालय का बर्फ तेजी से पिघल रहा है. इन क्षेत्रों में बरसात की प्रकृति बदल गई है और हिमालय के आस पास बढ़ता तापमान स्थानीय लोगों और वन्य जीवन पर असर डाल रहा है. हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग जलवायु परिवर्तन के साक्षात गवाह है . हिमालय के ग्लेशियर प्रकृति के धरोहर है ,यदि ये ग्लेशियर यूँ ही पिघलते रहे तो जन-जीवन पर व्यापक असर होगा .

भारत ,भूटान, नेपाल और बांग्लादेश ने संयुक्त रूप से इस गंभीर समस्या के निदान के लिए प्रयास शुरू किया है . चारों पड़ोसी देश ऊर्जा, पानी, खाद्य और जैव विविधता के मुद्दों पर सहयोग के लिए वचनबद्ध हो गए हैं. वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड (डब्ल्यू.डब्ल्यू.एफ.) के मुताबिक भूटान की राजधानी थिम्पू में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए. समझौते के तहत ऐसी योजनाएं बनाने पर सहमति बनी है जो जलवायु परिवर्तन के अनुरूप हिमालय को बचाने में मददगार हों.  "क्लाइमेट सम्मिट फॉर लिविंग हिमालयाज" के नाम से दो दिन तक चले सम्मेलन के बाद भारत, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के बीच  समझौता हुआ ;चारोँ देशों में हिमालयी क्षेत्र में वन्य जीव संरक्षण को बढ़ावा देने, वनों को बचाने , खाद्य और पानी की आपूर्ति को बचाए रखने पर सहमति बनी है.

इस समझौते के तहत कार्य योजना बनाने और उसके क्रियान्वयन  में यदि चारोँ देश गंभीरता से जुट गए तो हिमालय के ग्लेशियर को बचाने  कुछ हद तक कामयाबी मिल सकती है . यह प्रयास दुनिया के अन्य देशों के लिए भी मिशाल बनेगा .

18 नवंबर, 2011

हिंद महासागर में मिला गोंडवाना-लैंड

वैज्ञानिकों ने हिंद महासागर में जलमग्न दो द्वीपों का पता लगाने का दावा किया है। बताया गया है कि ये किसी जमाने में भारत और ऑस्ट्रेलिया के भूखंडों का हिस्सा थे। ये डूबे द्वीप दुनिया के मौजूदा नक्शे का रहस्य खोल सकते हैं।

ऑस्ट्रेलिया से पश्चिम में करीब 1,600 किलोमीटर अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा में दो द्वीपों का पता चला। पिछले महीने मिले इन द्वीपों की चट्टानों में उथले जल में पाए जाने वाले जीवों के जीवाश्म मिले हैं। सिडनी यूनिवर्सिटी की जो विटटेकर के मुताबिक इससे पता चलता है कि ये द्वीप समुद्र के भीतर की ज्वालामुखीय क्रियाओं ने नहीं बनाए बल्कि ये महाद्वीप का हिस्सा रहे होंगे।

महत्वपूर्ण खोज : 
विटटेकर इस खोज को उत्साहजनक बताती हैं क्योंकि इससे पता चल सकता है कि कैसे आठ से 13 करोड़ साल पहले गोंडवाना के टूटने से ऑस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और भारत का निर्माण हुआ। इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिकों में शामिल विटटेकर बताती हैं कि उनकी दिलचस्पी खासतौर पर भारत के पहले उत्तर पश्चिम और फिर एकदम उत्तर की ओर खिसक जाने में है, जहां भारत का उत्तर पूर्वी तट कभी ऑस्ट्रेलिया से जुड़ा हुआ था। लेकिन बाद में भारत अलग हुआ और यूरेशिया से इतनी जोर से टकराया कि हिमालय का निर्माण हुआ।

विटटेकर कहती हैं, 'हमें इस का काफी सही अंदाजा है कि वे महाद्वीप कहां थे लेकिन हमें सटीक जानकारी नहीं है। टेक्टोनिक्स के मामले में पूर्वी हिंद महासागर सबसे कम खंगाले गए इलाकों में से है। नई रिसर्च से हमें प्लेटों की गतिशीलता का पता चलेगा जिसकी वजह से भारत ऑस्ट्रेलिया से दूर होता है और यूरेशिया में टकराने की ओर बढ़ता है।'

कैसे बने होंगे ये द्वीप :
ये द्वीप समुद्र तल से करीब दो हजार मीटर नीचे हैं। उनकी चोटी से रेतीले पत्थरों और ग्रेनाइट की चट्टानों के नमूने लिए गए हैं। उनकी उम्र का पता लगाया जाना अभी बाकी है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि उनकी उम्र एक अरब साल तक हो सकती है। इन चट्टानों की तुलना ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से की जाएगी ताकि पता लगाया जा सके कि द्वीप कहां से टूटे। भारत के साथ इस तरह की तुलना संभव नहीं है क्योंकि जहां से टूट हुई होगी, वह तट अब कहीं हिमालय में खो चुका है। भारत का पूर्वी तट कभी वहां हुआ करता था जहां आज अंटार्कटिका है।

विटटेकर कहती हैं कि महाद्वीपों का अलग होना कुछ ऐसा रहा होगा जैसे किसी चिपचिपी चीज को खींचा जाए। ऐसे में कुछ टुकड़े बच गए। इन टुकड़ों की मोटाई सामान्य से काफी कम है। उन्होंने बताया, 'लगभग स्कॉटलैंड के आकार के ये टुकड़े शायद उतने मोटे नहीं रहे होंगे जितने महाद्वीप थे। इसलिए वे पानी में नीचे बैठ गए।'

विटटेकर उम्मीद कर रही हैं कि उन्हें कुछ बहुत अच्छे नमूने और स्पष्ट महाद्वीपीय चट्टानें मिल जाएंगी जिनसे पता चलेगा कि ये द्वीप असल में गोंडवाना के हिस्से हैं।

प्लेट टेक्टोनिक सिद्धांत ज्यादा पुराना नहीं है। यह 1950 में संपादित हुआ। विटटेकर बताती हैं कि अभी भी विशेषज्ञ यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि किस वजह से द्वीप एक दूसरे से अलग होकर अलग-अलग दिशाओं में बहने लगे। ऑस्ट्रेलिया लगभग सात सेंटीमीटर सालाना की रफ्तार से उत्तर की ओर बढ़ रहा था। दूसरी तरफ अंटार्कटिका स्थिर था और बिल्कुल नहीं हिल रहा था।


16 नवंबर, 2011

तिहाड़ में खुली लाटरी

तिहाड़ जेल से अगले छह माह के अन्दर रिहा होने वाले कैदियों की लाटरी खुल गई है . देश की कई नामी गिरामी कंपनियों ने शानदार पैकेज  के साथ 80 कैदियों को नौकरी का लेटर थमाया है जिनमे 10 महिला कैदी भी शामिल है .कंपनियों ने बेहतर कार्यक्षमता वाले कैदियों को  वेतन देने में काफी उदारता दिखाई है और तीन कैदियों को छह-छह लाख रुपए के वार्षिक पैकेज पर रखा है. तिहाड़ में प्लेसमेंट के लिए पहुंचे विभिन्न  कंपनियों के प्रतिनिधियों के समक्ष 90 कैदियों ने आवेदन किया  जिसमें से 80 को नौकरी दी गई.आवेदन करने वाली सभी 10 महिला कैदियों  को रोजगार दिया गया. महिला कैदियों का पैकेज भी दो लाख से पांच लाख रुपए सालाना का रखा गया है.

कैदियों को छह लाख रुपए तक का पैकेज देकर रिकॉर्ड बनाने वाली कंपनी का नाम मिलेनियम बिल्डर्स है .जिस कैदी को 6 लाख रुपये साल का पैकेज मिला है ,  उसे  अपहरण के एक मामले में सेशन कोर्ट से उम्र-कैद की सजा मिली हुई है अभी हाई कोर्ट में उसकी अपील विचाराधीन है. यूपी के उस युवक ने  कानपुर युनिवर्सिटी से बीए की थी . जेल में रहते हुए वह टूरिज़म मैनेजमेंट में मास्टर्स और सोशल वर्क में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा कोर्स कर रहा है. वह दोनों कोर्स जेल में ही बने इग्नू के सेंटर से कर रहा है.उसने कंप्यूटर में भी कई पीजी और डिप्लोमा कोर्स कर रखे हैं.

जेल में रहते हुए अच्छी नौकरी मिल जाने से निश्चित रूप से वह  प्रसन्न होगा .यदि वह जेल से छूट कर अच्छे काम में लग जाता है तो यह अच्छी बात है . अपने पूर्व के अपराधों के पश्चाताप स्वरूप उसे नई पीढ़ी को अपराध की दुनिया से दूर रहने के लिए प्रेरित करना चाहिए .
 
 
 


 

13 नवंबर, 2011

सहकारिता यानी " सब के लिए एक और एक के लिए सब "


सहकारिता का सप्तरंगी ध्वज
आज देश के प्रथम प्रधान मंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू का जन्म दिन है .हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी आज के दिन को बाल दिवस के रूप में मनाया गया . सहकारी आन्दोलन के प्रति पं. नेहरू के योगदान के मद्देनजर प्रति वर्ष 14 नवंबर से 20 नवंबर तक सहकारी  सप्ताह मनाया जाता है . सहकारी संस्थाओं द्वारा गोष्ठी, प्रदर्शनी व सभा -सम्मलेन के माध्यम से सहकारी आन्दोलन का प्रचार प्रसार किया जाता है .

वास्तव में सहकारिता मनुष्य के सर्वांगीण विकास का सर्वोत्तम माध्यम है , यह आम आदमी को आर्थिक रूप से सक्षम बनाता है . जिस देश में सहकारी आन्दोलन मजबूत होगा उस देश की आर्थिक हालत भी मजबूत होगी . अतः देश के आर्थिक सुदृढ़ीकरण के लिए सहकारी आन्दोलन को सुदृढ़ बनाना अति आवश्यक है .  सहकारिता के प्रति जन विश्वास को और अधिक मजबूत बनाने के लिए सहकारिता से जुड़ी संस्थाओं और इससे जुड़े लोगों कोकाफी मेहनत की जरुरत है .


सहकारिता की मूल भावना है " सब के लिए एक और एक के लिए सब " . इसी मूल भावना को जमीनी स्तर पर ले जाना होगा .सहकारिता हमें पारस्परिक सहयोग के आधार पर स्वावलंबन  एवं आत्मनिर्भर जीवन जीने का अवसर प्रदान करता है .