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11 मार्च, 2011

भा.ज.पा.सहकारिता प्रकोष्ठ का जंतर-मंतर नई दिल्ली में प्रदर्शन एवं राष्ट्रपति को ज्ञापन





भारतीय जनता पार्टी सहकारिता प्रकोष्ठ ने राष्ट्रपति महामहिम श्रीमती प्रतिभा पाटिल से दिनांक 07 मार्च 2011 को  भेंट कर बहुराज्यीय  सहकारी समिति अधिनियम संशोधन विधेयक 2010 एवं प्रत्यक्ष कर संहिता विधेयक 2010 को वापस लेने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा । प्रतिनिधिमंडल में सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन, प्रकोष्ट के राष्ट्रीय प्रभारी श्री संतोष गंगवार, प्रकोष्ट के राष्ट्रीय संयोजक श्री धनंजय कुमार सिंह, सांसद श्री ए.टी. नाना पाटिल, सांसद श्री हुकुमनारायण देव सिंह, सह-संयोजक श्री सुनील गुप्ता, श्री अशोक बजाज, श्रीमती वर्षा मांडुलकर एवं श्री अशोक दबाज  नई दिल्ली शामिल थे।
 
राष्ट्रपति से मिलने से  पूर्व भा.ज.पा.सहकारिता प्रकोष्ठ के आव्हान पर देश भर से पंहुचें सहकारी कार्यकर्ताओं  ने    प्रत्यक्ष कर संहिता एवं बहुराज्यीय सहकारी अधिनियम संशोधन विधेयक के विरोध में  जंतर मंतर नई दिल्ली में प्रदर्शन किया।बहुराज्य सहकारी सोसाइटी (संशोधन) विधेयक-2010  में आमसभा के पारित नियमों को केंद्रीय रजिस्ट्रार  को संशोधित करने का अधिकार दिया जा रहा है, जो कि प्रजातन्त्र की मूल भावना के खिलाफ  है। सहकारिता जीवन पद्धति है एवं देश की बुनियाद सहकारिता है। केंद्र सरकार सहकारिता को कुचलने का प्रयास कर रही है। सरकार की सहकारी विरोधी  नीति के चलते सहकारी समितियों एवं संस्थाओं की आर्थिक सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। प्रदर्शन में  श्री  धनंजय कुमार सिंह, सांसद श्रीमती  सुमित्रा महाजन, राज्यसभा के सदस्य श्री नंदकुमार साय, श्री गोपाल व्यास,  श्री श्रीमती अनुसुईया उइके, प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय प्रभारी  श्री संतोष गंगवार, पूर्व केंद्रीय मंत्री भावना बेन चिखलिया, सह संयोजक द्वय श्री सुनील गुप्ता, श्रीमती वर्षा  माडगुलकर, प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्य भंडार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, उपाध्यक्ष  श्री राधाकृष्ण गुप्ता, श्री लखनलाल साहू, जिला सहकारी बैंक बिलासपुर के अध्यक्ष  श्री देवेंद्र पांडेय, दुर्ग के  श्री प्रीतपाल बेलचंदन, अंबिकापुर से  श्री राजाराम भगत,  श्री प्रवीण चंद्राकर, राजनांदगांव के  श्री शशिकांत द्विवेदी  के अलावा  छत्तीसगढ़ के लगभग 650 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया ।







04 मार्च, 2011

महाशिवरात्रि पर्व एवं राजिम अर्ध्दकुंभ 2011 के समापन की झलकियां

महाशिवरात्रि पर्व एवं राजिम अर्ध्दकुंभ 2011 के समापन की झलकियां

ग्राम केंद्री में पूजा अर्चना
ग्राम केंद्री के मंच में अशोक बजाज के साथ श्रीराम सिन्हा ,पोखन साहू एवं इलेक्ट्रानिक मिडिया के राजेश शुक्ला .

ग्राम केंद्री में अशोक बजाज का स्वागत करते हुए नेतराम साहू

ग्राम केंद्री ,बेन्द्री एवं सिंगारभांठा के सेंटर में स्थित नागेश्वर महादेव 


राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में पहुंचें  महामहिम राज्यपाल  श्री शेखर दत्त


राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में पहुंचें  मूर्धन्य साधू-संत

राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में चर्चा करते हुए  महामहिम राज्यपाल  श्री शेखर दत्त एवं श्री बृजमोहन अग्रवाल
राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में  पुस्तक का विमोचन
राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में  एक सी.डी.का विमोचन
राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में  उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित करते हुए श्री अशोक बजाज
राजिम अर्द्ध कुंभ के समापन समारोह में  उपस्थित जन-समुदाय को संबोधित करते हुए श्री अशोक बजाज
राजिम अर्द्ध कुंभ की सफलता  से गदगद साधु-संत
समापन के बाद गूँजें साधु-संतों के  ठहाके
समापन मंच में (ऊपर )श्री राजीव लोचन की आरती ,(नीचे  ) मंच में बैठे अतिथि गण     
छत्तीसगढ़ यादव समाज की वार्षिक आम-सभा
छत्तीसगढ़ यादव समाज की वार्षिक आम-सभा
छत्तीसगढ़ यादव समाज की वार्षिक आम-सभा
छत्तीसगढ़ यादव समाज की वार्षिक आम-सभा

02 मार्च, 2011

महाशिवरात्रि का पर्व

  आज महाशिवरात्रि का पावन पर्व है , हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को शिवरात्रि पर्व मनाया जाता है। माना जाता है कि सृष्टि के प्रारंभ में इसी दिन मध्यरात्रि भगवान् शंकर का ब्रह्मा से रुद्र के रूप में अवतरण हुआ था। प्रलय की वेला में इसी दिन प्रदोष के समय भगवान शिव तांडव करते हुए ब्रह्मांड को तीसरे नेत्र की ज्वाला से समाप्त कर देते हैं। इसीलिए इसे महाशिवरात्रि अथवा कालरात्रि कहा गया। तीनों भुवनों की अपार सुंदरी तथा शीलवती गौरी को अर्धांगिनी बनाने वाले शिव प्रेतों व पिशाचों से घिरे रहते हैं। उनका रूप बड़ा अजीव है। शरीर पर मसानों की भस्म, गले में सर्पों का हार, कंठ में विष, जटाओं में जगत-तारिणी पावन गंगा तथा माथे में प्रलयंकर ज्वाला है। बैल को वाहन के रूप में स्वीकार करने वाले शिव अमंगल रूप होने पर भी भक्तों का मंगल करते हैं और श्री-संपत्ति प्रदान करते हैं।
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आप सबको बहुतबहुत बधाई एवं शुभकामनाएं ! भगवान शिव आपकी हर इच्छा की पूर्ति करें ।


सत्यम् शिवम् सुंदरम्

26 फ़रवरी, 2011

2020 तक हाहाकार मचा देगा जलवायु परिवर्तन



 जलवायु परिवर्तन का असर इसी दशक में इतने भयानक रूप में सामने आ सकता है कि दुनिया में हाहाकार मच सकता है. 2020 तक ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से पांच करोड़ से ज्यादा लोग बेघरबार   हो जाएंगे.

अमेरिका के वॉशिंगटन में जारी एक साइंस कान्फ्रेंस में वैज्ञानिकों ने कहा कि ये पांच करोड़ लोग भूखे मरने की हालत में होंगे.  इन्हें अपने घर छोड़कर दुनिया के उत्तर की तरफ भागना होगा. अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द अडवांसमेंट ऑफ साइंस (एएएएस) की सालाना बैठक में कैलिफॉर्निया विश्वविद्यालय की प्रोफेसर क्रिस्टीना तिरादो ने कहा,  "यूएन के अनुमान के मुताबिक 2020  तक दुनिया में पांच करोड़ से ज्यादा पर्यावरणीय शरणार्थी होंगे. जब लोग जीने की हालत में नहीं रह पाते तभी वे अपने घरों को छोड़कर दूसरी जगह जाते हैं."

कम हो रहा है खाना

बैठक में वैज्ञानिकों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर दिखने लगा है. यह हमारे भोजन को प्रभावित कर रहा है. दक्षिणी यूरोप में तो अफ्रीका से शरणार्थी पहुंचने भी लगे हैं. यह फिलहाल बहुत धीमा है लेकिन लगातार हो रहा है. कई लोग तो अपनी जान खतरे में डालकर सीमाएं पार कर रहे हैं.

हाल ही में ट्यूनिशिया में सत्ता पलटने के बाद काफी बड़ी तादाद में लोग यूरोपीय देशों में आ गए हैं. मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के इवेन टोड कहते हैं कि इसकी वजह खाने की कमी, बेरोजगारी और गरीबी है. टोड कहते हैं कि यह सिर्फ शुरुआत है. उन्होंने कहा, "हमने ट्यूनिशिया में देखा कि जैसे ही सरकार बदली, हजारों लोग इटली की तरफ भाग गए. यह जल्दी ही एक चलन बन जाएगा. अफ्रीकी लोग पहले ही जर्मनी, स्पेन और आसपास के देशों में जा रहे हैं. ऐसे लोगों की संख्या और बढ़ेगी. इसकी वजह खाने पर बढ़ता दबाव है."

गरीबी बढ़ेगी

टोड कहते हैं कि मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीकी देशों के बहुत सारे देशों में राजनीति, धर्म और दूसरे मुद्दों का घालमेल हो चुका है लेकिन असली बात गरीबी ही है. वैज्ञानिकों के मुताबिक मौसम में हो रहे बदलाव का असर खाद्य सुरक्षा पर पड़ रहा है. अमेरिका के कृषि मंत्रालय में वैज्ञानिक रे नाइटोन कहते हैं कि सर्दियां गर्म हो रही हैं जिसकी वजह से पौधों को बीमार करने वाले कीट ज्यादा समय तक जिंदा रहते हैं और गर्मियां आते ही फसलों पर हमला कर देते हैं.

नाइटोन ने कहा, "जलवायु परिवर्तन का एक असर बारिश पर भी दिखाई दे रहा है. फसल कटने के मौसम में बारिश हो रही है जिससे फसलें संक्रमित होकर खराब हो जाती हैं." यह सब खाद्य सुरक्षा पर असर डाल रहा है.