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06 जनवरी, 2015

भाजपा की जीत

अभनपुर नगर पंचायत चुनाव की मतगणना दिनांक 4 जनवरी 2015 को संपन्न हुई जिसमें भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी श्री कुंदन बघेल एवं 9 पार्षदों ने विजय हासिल की. परिणाम की घोषणा के साथ ही जश्न मनाने का सिलसिला शुरू हुआ.












24 दिसंबर, 2014

’’अटल-प्रतिज्ञा’’ का परिणाम है छत्तीसगढ़ राज्य

(पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर पर विशेष)
                                          

    पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटलबिहारी बाजपेयी देश के सर्वाधिक लोकप्रिय एवं सर्वमान्य नेता के रूप में जाने जाते है. वे सदैव सुचिता, सुशासन और सुराज के हिमायती रहें है. उन्होंने अपने लंबे राजनितिक जीवन में ना कभी मूल्यों से समझौता किया और ना ही अपनी कथनी व करनी में भेद किया. अटलजी ने जो कहा वही किया तथा जो किया वही कहा. अपनी प्रभावी वाक-शैली के बल पर लाखों की भीड़ को घंटों बांध कर रखने की उनमें अद्भूत क्षमता है. वे सत्ता व विपक्ष दोनों की भूमिका में श्रेष्ठ साबित हुए है. श्री बाजपेयी के पास 40 वर्षो से अधिक का एक लम्बा संसदीय अनुभव है. वे 1957 से सांसद रहे हैं. वे पांचवी, छठी और सातवी लोकसभा तथा फिर दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं और चैदहवीं लोकसभा के लिए चुने गए और सन् 1962 तथा 1986 में राज्यसभा के सदस्य रहे, वे लखनऊ (उत्तरप्रदेश) से लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने गए. वे ऐसे अकेले सांसद हैं जो अलग-अलग समय पर चार विभिन्न राज्यों उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश तथा दिल्ली से निर्वाचित हुए हैं.

    अटल जी अस्वस्थता की वजह से पिछले कुछ वर्षो से भले ही सक्रिय राजनीति से दूर है लेकिन उनका वकृत्व व कतृत्व आज भी आम जनता के मानस पटल पर आच्छादित है. छत्तीसगढ़ की जनता तो उनकी विशेष रूप से आभारी है क्योंकि उन्होंने एक झटके में छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण कर अपनी कथनी और करनी की समानता को सिद्ध किया था. उन्होंने सन 1998 में सप्रेशाला रायपुर के मैदान में एक अटल-प्रतिज्ञा की थी कि यदि आप लोकसभा की 11 में से 11 सीटों में भाजपा को जितायेंगे तो में तुम्हें छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा. हालाॅकि चुनाव में भाजपा को 11 में से मात्र 8 सीटे ही मिली थी लेकिन केंद्र में अटलजी की सरकार फिर से बन गई. उन्होंनेे अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप राज्य निर्माण के लिए पहले ही दिन से प्रक्रिया प्रारंभ कर दी. मध्यप्रदेश राज्य पुर्निमाण विधेयक 2000 को 25 जुलाई 2000 को लोकसभा में पेश किया गया, इसी दिन दो अन्य प्रस्तावित राज्यों उत्तराखंड और झारखंड का विधेयक भी पेश हुआ. लोकसभा 31 जुलाई 2000 को और राज्य सभा में 9 अगस्त को छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर विधिवत मुहर लग गई. 25 अगस्त को महामहिम राष्ट्रपति ने इसे मंजूरी दे दी. 4 सितंबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया. इसके साथ ही छत्तीसगढ़ की जनता की बहुप्रतीक्षित मांग पूरी हुई और साथ ही साथ अटलजी की एक अटल-प्रतिज्ञा भी पूरी हुई.

    अटल जी ने ना केवल छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण किया बल्कि इसके विकास के लिए पर्याप्त संसाधन भी उपलब्ध कराये. फलस्वरूप पिछले 14 वर्षो में छत्तीसगढ़ ने ग्रामीण व शहरी विकास के मामले में लंबी छलांग लगाई है.राज्य गठन के समय गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता एवं पिछड़ापन हमें विरासत में मिला था. लेकिन चैदह वर्षो में गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता एवं पिछड़ापन के खिलाफ संघर्ष करके छत्तीसगढ़ आज ऐसे मुकाम पर खड़ा है. जहां देखकर अन्य विकासशील राज्यों को हमसे ईष्र्या हो सकती है. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से नगर, गांव व कस्बों की तकदीर व तस्वीर तेजी से बदल रही है. नई सरकार के लिए गांवों का विकास एक बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन इस काल-खण्ड में विकास कार्यो के सम्पन्न हो जाने से गांव की नई तस्वीर उभरी है. गांव के किसानों को सिंचाई, बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ जैसी मूलभूत सेवांए प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराई गई है. हमें याद है कि पहले गाॅंवों में ग्राम पंचायतें थी लेकिन पंचायत भवन नहीं थे, शालाएं थी लेकिन शाला भवन नहीं थे, सड़के तो नहीं के बराबर थी, पेयजल की सुविधा भी नाजुक थी लेकिन अब गंावों में सेवाओं व सुविधाओं का विस्तार हुआ है. विकास कार्यो के नाम पर पंचायत भवन, शाला भवन, आंगनबाड़ी भवन, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, उप स्वास्थ केन्द्र, निर्मला घाट, मुक्तिधाम जैसे अधोसंरचना के कार्य गांव-गांव में दृष्टिगोचर हो रहे है. अपवाद स्वरूप ही ऐसे गांव बचें होंगे जहाॅं बारहमासी सड़कों की सुविधा ना हो, गांवों को सड़कों से जोड़ने से गांव व शहर का फासला कम हुआ है. अनेक गंभीर चुनौतियों के बावजूद ग्रामीण विकास के मामले में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है. छत्तीसगढ़ का भूखमरी से मुक्त कराने के लिए डा. रमन सिंह की सरकार ने बी. पी. एल. परिवारों को 1 रूपये/2 रूपये किलों में प्रतिमाह 35 किलों चावल देने का एतिहासिक निर्णय लिया जो देश भर में अनुकरणीय बन गया है. किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण प्राप्त हो रहा है. स्कूली बच्चों को मुफ्त में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई जा रहीं है. वनोपज संग्रहणकर्ता मजदूरों को चरण - पादुकाएं दी जा रहीं है. अगर यह संभव हो पाया तो केवल इसलिए कि माननीय अटलबिहारी बाजपेयी ने एक झटके में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया, छत्तीसगढ़ की जनता अटल जी की सदैव  ऋणी रहेगीं. 

 - अशोक बजाज








28 नवंबर, 2014

पलायन का दर्द

पने फेसबुक वाल में दिनांक 24 नवंबर 2014 को छत्तीसगढ़ के सन्दर्भ में मैंने भूखमुक्त और पलायन मुक्त राज्य का जिक्र किया था, जिस पर कुछ मित्रों ने कतिपय अखबारों में छपी खबरों का हवाला देकर उसे गलत सिद्ध करने का प्रयास किया है. मै चाह कर भी कमेंट्स का जवाब नहीं दे रहा था, क्योकि यदि जवाब दूंगा तो लंबी बहस छिड़ जायेगी. दरअसल कुछ दलाल किस्म के लोग ज्यादा मजदूरी और अच्छी सुविधा का हवाला देकर लोगों को बाहर ले जा रहे है. जबकि मैंने जिस प्रकार के पलायन का जिक्र किया है वह अलग है, जब कोई व्यक्ति या परिवार काम के अभाव में बेबस व लाचार हो जाता है तथा उसके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाती है तब वह अपने घर द्वार को छोड़ कर इधर उधर काम की तलाश में भटकता है. ईश्वर की कृपा से वर्तमान में अपने राज्य में यह स्थिति नहीं है. नवंबर- दिसंबर महीना तो वैसे भी धान कटाई का सीजन होता है, आज की परिस्थिति में धान की कटाई के लिए किसानों को बड़ी मुश्किल से मजदूर मिल पा रहें है. मजदूरों के अभाव में किसानों को हार्वेस्टर से धान कटाई करनी पड़ रही है. अतः ऐसे समय में जो लोग बाहर जा रहे है वो मजबूरी या लाचारी से नहीं बल्कि ज्यादा पारिश्रमिक तथा अच्छी सुविधा के लिए बाहर जा रहे है. फिर भी मै मानता हूँ कि पलायन एक अभिशाप है, चाहे गाँव के मजदूरों का पलायन हो अथवा संपन्न व शिक्षित परिवार के उन युवकों का पलायन हो जो अच्छी सुविधा अथवा स्टेटस के नाम पर देश छोड़ कर विदेशों में अपना आशियाना तलाश रहें हों.

इराक का ताज़ा उदहारण हमारे सामने है जहाँ 39 भारतीय पिछले 12 जून 2014 से आतंकवादियों के चंगुल में है, इनकी जान को लेकर सारा देश चिंतित है.  ये सभी लोग भारत से पलायन कर मजदूरी करने इराक गए है. उन्हीं में से एक हरजीत भी है जो अपने अच्छे भविष्य और परिवार की गरीबी दूर करने की सोच लेकर कर्ज उठाकर करीब एक साल पहले इराक गया था और वहां मसूल में एक कंपनी में काम करने पहुंचा तो इराक में चल रहे गृह युद्ध के चलते वह 12 जून 2014 को आतंकियों के हत्थे चढ़ गया था परन्तु वह किसी तरह भाग निकला. शेष 39 के बारे में किसी के पास कोई पुष्ट जानकारी नहीं है.
  

08 नवंबर, 2014

अटलजी के ऋणी

त्तीसगढ़ राज्य स्थापना के 14 साल पूर्ण हो चुके है, इस राज्य की स्थापना 1 नवंबर 2000 को हुई थी. इन चौदह वर्षों में छत्तीसगढ़ ने विकसित रूप ले लिया है. इस राज्य का निर्माण देश के लाडले नेता माननीय अटलबिहारी वाजपेयी के प्रधानमंत्रित्व काल में हुई थी . वास्तव में यह राज्य उन्हीं की दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है . अगर अटलजी प्रधानमंत्री नहीं बने होते तो शायद राज्य का निर्माण नहीं हो पाता. राज्य निर्माण क्या हुआ यहाँ प्रगति का द्वार खुल गया. विशेषकर यहाँ के गावों की तस्वीर ही बदल गई, जब जब मै गावों के विकसित रूप को देखता हूँ अटलजी के प्रति आभार प्रकट करता हूँ . इसी प्रकार जब जब स्थापना दिवस आता है तब तब हर छत्तीसगढ़वासी को उनकी जरुर याद आती है. छत्तीसगढ़ महतारी को सजाने - संवारने तथा यहाँ की माटी की सौंध को महकाने के लिए हम उनके सदा ऋणी रहेंगें. 

 - अशोक बजाज अभनपुर , रायपुर (Ashok Bajaj Abhanpur Raipur)