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08 अक्तूबर, 2011

दशहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन



नीलकंठ

शहरा पर्व पर नीलकंठ के दर्शन को शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है. जिसके चलते दशहरे के दिन हर व्यक्ति इसी आस में छत पर जाकर आकाश को निहारता है ताकि साल भर उनके यहाँ शुभ कार्य का सिलसिला चलता रहे. ऐसा माना जाता है कि इस दिन नीलकंठ के दर्शन होने से घर के धन-धान्य में वृद्धि होती है, तथा  फलदायी एवं शुभ कार्य घर में अनवरत्‌ होते रहते हैं.  सुबह से लेकर शाम तक किसी वक्त नीलकंठ दिख जाए तो वह देखने वाले के लिए शुभ होता है.

हम भी दशहरा मनाने निकले तो रास्ते भर सड़क के किनारे की झाड़ियों , खेतों व बिजली के तारों को निहारते रहे . 12 कि.मी. दूर जाने पर बिजली के तार एक नीलकंठ बैठा दिखाई दिया . हमारे साथी श्री श्याम वर्मा ने फोटो खींचने की बहुत कोशिश की  लेकिन साफ फोटो नहीं खिंच पाए , क्योंकि पक्षी सूर्य की दिशा में था . हम लोग उसके उड़ने का इंतजार करने लगे लेकिन काफी देर रूकने के बावजूद भी वह नहीं उड़ा. अलबत्ता वहां काफी भीड़ जमा हो गई . भीड़ से बचाते हुए हम आगे बढ़ गए . रायपुर से अभनपुर पंहुचते तक 27 कि.मी. के सफ़र में 10 - 12 नीलकंठ विभिन्न विभिन्न मुद्राओं में दिखाई दिए .

 नीलकंठ पक्षी को भगवान राम का संदेशवाहक माना जाता है इसीलिये कहा भी गया है -----


    नीलकंठ तुम नीले रहियो, दूध-भात का भोजन करियो, हमरी बात राम से कहियो'

भगवान शिव को भी  नीलकंठ कहा गया है  क्योकिं  उन्होंने सर्वकल्याण के लिए विषपान किया था. इसीलिए शिव कल्याण के प्रतीक है. ठीक इसी तरह ईश्वर के बनाए नीलकंठ पक्षी भी है . इस रंग बिरंगी खूबसूरत पक्षी का गला भी शिव की तरह नीला होता है.

 नीलकंठ दुर्लभ प्रजाति का संरक्षित पक्षी है. चिता का विषय यह है  पर्यावरणीय असंतुलन के कारण  अब यह शुभ दायक खूबसूरत पक्षी विलुप्त होते जा  रहा है . लोग  नीलकंठ दर्शन के लिए तरस रहे है.    इसके पीछे पर्यावरण संतुलन के साथ-साथ फसलों में प्रयोग किया जाने वाला कीटनाशक भी  है.

अब देखिये रावण दहन के दृश्य ........

अभनपुर का दशहरा
खोला ग्राम का दशहरा
नवापारा का दशहरा
दैनिक अग्रदूत रायपुर  7.10.2011      

 

07 अक्तूबर, 2011

संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स


दुनियाभर में कंप्यूटर से लेकर आई पॉड और आई फोन के जरिए संचार प्रौद्योगिकी में क्रांति लाने वाले एप्पल के सह-संस्थापक 56 वर्षीय  स्टीव जॉब्स का आज दुखद  निधन हो गया. वे  पैंक्रियास कैन्सर से पीड़ित थे.

Steve Jobs
 इस वर्ष जनवरी के बाद से वे  कंपनी के कामकाज से छुट्टी पर थे, यदा कदा ही काम पर   दिखाई देते थे. मार्च में उन्होंने आई पैड का दूसरा संस्करण बाजार में उतारा और फिर सिलिकान वैली में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा टैक्नॉलॉजी के दिग्गजों के लिए आयोजित रात्रि भोज में शामिल हुए. जून में वे  सान फ्रांसिस्को में एप्पल के आई क्लाउड के बारे में बताने के लिए एक बार फिर सामने आए.

एप्पल के सबसे ज्यादा प्रचलित और प्रतिष्ठित उत्पाद जैसे आईपॉड, आई फोन और आईपैड जॉब्स की दूरदर्शिता और कौशल के  परिणाम थे. उनके नेतृत्व में एप्पल ने आई पॉड के जरिए संगीत जगत की नयी परिभाषा गढ़ी. आई फोन ने मोबाइल की दुनिया का अंदाज बदला और आई पैड  ने मनोरंजन और मीडिया जगत को नये मायने दिए.
 
जॉब्स ने 1976 में अपने घर के गैरेज में स्टीव वोज्नियाक के साथ एप्पल की शुरुआत की और एप्पल दो तथा मैकिनटोश कंप्यूटर्स का विकास किया.उन्होंने कंपनी के निदेशक मंडल के साथ विवाद के चलते 1985 में कंपनी छोड़ दी थी.अगले वर्ष उन्होंने नैक्स्ट कंप्यूटर की स्थापना की. 1986 में उन्होंने लुकासफिल्म के कंप्यूटर ग्राफिक्स डिवीजन को खरीद लिया और इसे एक स्वतंत्र एनीमेशन स्टूडियो पिक्सर के तौर पर फिर से स्थापित किया.
करीब एक दशक बाद 1996 में एप्पल ने नैक्स्ट को खरीद लिया और जॉब्स को एप्पल में वापिस लाया गया. 1997 से जॉब्सने कंपनी के सीईओ के तौर पर काम शुरू किया और जीवन के अंतिम दिनों तक इसी पद पर बने रहे.
 
संचार क्रांति के पुरोधा स्टीव जॉब्स  ने अपने आविष्कारों के जरिये दुनिया भर में अपना गहरा छाप  छोड़ा है , निश्चित रूप से आने वाली कई पीढ़ियों तक उनका प्रभाव महसूस किया जाता रहेगा . ग्राम चौपाल की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि . 

Jobs, who touched the daily lives of countless millions of people through the Macintosh computer, iPod, iPhone and iPad, died on Wednesday at age 56 after a long battle with pancreatic cancer. He stepped down as Apple chief executive in August. (reuters)

06 अक्तूबर, 2011

रावण को खुद मारे माउस से

जय श्री राम 

आश्विन माके शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा पर्व मनाया जाता है. हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है. भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध कर अहंकार का नाश किया था. इसे असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में मनाया जाता है. इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है.

विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ रावण दहन की ऑनलाइन सुविधा वेबदुनिया की मदद से ग्राम चौपाल में  उपलब्ध है .

आप माउस की सहायता से नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर रावण दहन कर सकते हैं।

04 अक्तूबर, 2011

फल से लदी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना




धान का कटोरा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी लहलहा रहा है, पिछले वर्ष धान के रिकार्ड उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पुरष्कार दिया था. ईश्वर ने चाहा तो इस साल भी रिकार्ड बनेगा. खरीफ सीजन की धान की फसल पकने को तैयार है.  कुछ ही दिनों में काटने लायक हो जायेगी. सितंबर के महीने में ही धान की बालियों में दूध भर आया था जो धीरे धीरे चांवल के रूप में तब्दील हो जाता है. दूध भर आने के बाद धान की बालियाँ झुक जाती है. प्राथमिक शाला में पढाया भी जाता है ---

फूलों से नित हंसना सीखो, भौरों से नित गाना ;
फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना ;

मैं नेत्र दान शिविर में भाग लेने दो दिन पूर्व चंपारण गया था तो उस गाँव के प्रगतिशील युवा कृषक श्री शोभाराम साहू के आग्रह पर फसल का अवलोकन करने उसके खेतों में पहुँच गया, वे लगभग 16 एकड़ भूमि में नई तकनीक से खेती करते है. उनके खेतों में धान के अलावा गन्ने की फसल भी लहलहा रही है. कुछ हिस्से में साग-सब्जी भी है . उनके प्लाट में विद्युत् पंप भी है. बड़ी मुश्किल से पानी मिला है. पानी के अभाव में उन्होंने कुछ वर्षों से खेती से किनारा कर लिया था. बोरवेल फेल हो जाते थे. किसी की सलाह पर उन्होनें नया बोर कराया तो भरपूर पानी मिल गया. फिर क्या था , खेती की तरफ उनका रुझान फिर बढ़ गया. अब तो खेती की बदौलत लाखों कमा रहें है. धान के अलावा गन्ने की चिल्हर बिक्री से प्राप्त आय से वे काफी संतुष्ट है, साग सब्जी और फलों से भी उन्हें काफी पैसा मिल जाता है . इस कार्य के लिए उन्हें 8 - 10 मजदूर स्थाई रूप से मिल गए है जो बारहों महीने काम पर आते है .  

धान की लहलहाती  फसल

गन्ने की फसल को दिखाते हुए युवा कृषक श्री शोभाराम साहू

गन्ने की नई फसल को निहारते हुए