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06 अक्तूबर, 2011

रावण को खुद मारे माउस से

जय श्री राम 

आश्विन माके शुक्ल पक्ष की दशमी को दशहरा पर्व मनाया जाता है. हिन्दुओं का प्रमुख त्योहार है. भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध कर अहंकार का नाश किया था. इसे असत्य पर सत्य, अधर्म पर धर्म तथा अन्याय पर न्याय की विजय के रूप में मनाया जाता है. इसीलिए इस दशमी को विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है.

विजयादशमी पर्व की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ रावण दहन की ऑनलाइन सुविधा वेबदुनिया की मदद से ग्राम चौपाल में  उपलब्ध है .

आप माउस की सहायता से नीचे दी गई लिंक पर क्लिक कर रावण दहन कर सकते हैं।

04 अक्तूबर, 2011

फल से लदी डालियों से नित सीखो शीश झुकाना




धान का कटोरा गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी लहलहा रहा है, पिछले वर्ष धान के रिकार्ड उत्पादन के लिए केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ को पुरष्कार दिया था. ईश्वर ने चाहा तो इस साल भी रिकार्ड बनेगा. खरीफ सीजन की धान की फसल पकने को तैयार है.  कुछ ही दिनों में काटने लायक हो जायेगी. सितंबर के महीने में ही धान की बालियों में दूध भर आया था जो धीरे धीरे चांवल के रूप में तब्दील हो जाता है. दूध भर आने के बाद धान की बालियाँ झुक जाती है. प्राथमिक शाला में पढाया भी जाता है ---

फूलों से नित हंसना सीखो, भौरों से नित गाना ;
फल से लदी डालियों से, नित सीखो शीश झुकाना ;

मैं नेत्र दान शिविर में भाग लेने दो दिन पूर्व चंपारण गया था तो उस गाँव के प्रगतिशील युवा कृषक श्री शोभाराम साहू के आग्रह पर फसल का अवलोकन करने उसके खेतों में पहुँच गया, वे लगभग 16 एकड़ भूमि में नई तकनीक से खेती करते है. उनके खेतों में धान के अलावा गन्ने की फसल भी लहलहा रही है. कुछ हिस्से में साग-सब्जी भी है . उनके प्लाट में विद्युत् पंप भी है. बड़ी मुश्किल से पानी मिला है. पानी के अभाव में उन्होंने कुछ वर्षों से खेती से किनारा कर लिया था. बोरवेल फेल हो जाते थे. किसी की सलाह पर उन्होनें नया बोर कराया तो भरपूर पानी मिल गया. फिर क्या था , खेती की तरफ उनका रुझान फिर बढ़ गया. अब तो खेती की बदौलत लाखों कमा रहें है. धान के अलावा गन्ने की चिल्हर बिक्री से प्राप्त आय से वे काफी संतुष्ट है, साग सब्जी और फलों से भी उन्हें काफी पैसा मिल जाता है . इस कार्य के लिए उन्हें 8 - 10 मजदूर स्थाई रूप से मिल गए है जो बारहों महीने काम पर आते है .  

धान की लहलहाती  फसल

गन्ने की फसल को दिखाते हुए युवा कृषक श्री शोभाराम साहू

गन्ने की नई फसल को निहारते हुए 
   

02 अक्तूबर, 2011

छत्तीसगढ़ में प्रथम रेडियो प्रसारण के पूरे हुए 48 साल

आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम --- बजाज 
श्रोता संघों ने मनाया आकाशवाणी रायपुर का स्थापना दिवस

प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता-निर्देशक श्री मनु नायक हुआ अभिनंदन

रेडियो प्रसारण सेवा के 48 वर्ष छत्तीसगढ़ में पूरे हो चुके हैं। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर दो अक्टूबर 1963 को यहां आकाशवाणी के रायपुर केन्द्र के प्रसारण की शुरूआत हुई थी। आकाशवाणी रायपुर का अड़तालिसवां स्थापना दिवस समारोह आज यहां चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल के सभा भवन में मनाया गया। इस अवसर पर आज से लगभग 46 वर्ष पहले 1965 में छत्तीसगढ़ी भाषा में निर्मित पहली कथा फिल्म 'कहि देबे संदेश' के निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक का नागरिक अभिनंदन भी किया गया। छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज समारोह के मुख्य अतिथि थे। उन्होंने श्री मनु नायक को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

मुख्य अतिथि की आसंदी से समारोह को सम्बोधित करते हुए श्री अशोक बजाज ने कहा कि देश के जन-जीवन पर रेडियो कार्यक्रमों का भी व्यापक असर होता है। श्री बजाज ने कहा कि आकाशवाणी के कार्यक्रमों की गुणवत्ता आज भी कायम है। विभिन्न केन्द्रों से गीत-संगीत के मनोरंजक कार्यक्रमों के साथ-साथ किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों से जुड़े ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी प्रसारित होते हैं। इस प्रकार के कार्यक्रमों के जरिए आकाशवाणी द्वारा राज्य सरकार और केन्द्र की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी आम जनता को दी जाती है, जिसका लाभ जरूरतमंद लोगों को मिलता है। श्री बजाज ने बालिका शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला और समाज में बेटियों के संरक्षण की जरूरत पर भी बल दिया। शारदीय नवरात्रि का उल्लेख करते हुए श्री बजाज ने कहा कि हमारे भारतीय समाज में महिलाओं को हमेशा देवी के रूप में सर्वोच्च सम्मान प्राप्त होता रहा है। हमारे यहां नदियों को भी माता के रूप में सम्बोधित किया जाता है।


 


स्थापना दिवस समारोह के साथ-साथ आकाशवाणी रायपुर के वरिष्ठ सेवानिवृत्त उदघोषक श्री लाल रामकुमार सिंह की अध्यक्षता में इस अवसर पर आकांक्षा रेडियो लिस्नर्स संस्था, धरसींवा द्वारा रेडियो श्रोताओं के विभिन्न संगठनों के सहयोग से अखिल भारतीय रेडियो श्रोता सम्मेलन भी आयोजित किया गया। समारोह में मुम्बई से आए वरिष्ठ छत्तीसगढ़ी फिल्म निर्माता और निदेशक श्री मनु नायक ने रेडियो श्रोताओं के इस सम्मेलन को अपने लिए एक नया तथा दिलचस्प अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि रेडियो कार्यक्रमों के प्रस्तुतकर्ताओं और प्रसारकों को वास्तविक ऊर्जा अपने श्रोताओं से ही मिलती है। श्री मनु नायक ने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलनों से रेडियो श्रोताओं और उदघोषकों के बीच भाईचारा बढ़ता है। श्रोताओं से रेडियो वालों को कई अच्छे सुझाव भी प्राप्त होते हैं। छत्तीसगढ़ में 46 वर्ष पहले फिल्म उद्योग की बुनियाद रखने वाले श्री मनु नायक ने इस मौके पर अपनी प्रथम छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' के फिल्मांकन से जुड़े संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने रेडियो श्रोताओं को बताया कि इस फिल्म में मोहम्मद रफी, महेंद्र कपूर, मन्नाडे, मीनू पुरूषोत्तम जैसे हिन्दी सिनेमा के अनेक जाने-माने गायकों ने छत्तीसगढ़ी गीत गाकर हमारी माटी का मान बढ़ाया था। फिल्म का पहला गीत छत्तीसगढ़ में प्रचलित पारम्परिक लोक शैली का ददरिया था, जिसे श्री महेन्द्र कपूर और सुश्री मीनू पुरूषोत्तम ने गाया था, जिसके बोल थे ....
कोयली रे कूकै, आमा के डार म,
चले आबे पतरेंगी, नवा तरिया पार म'

इस फिल्म के गीतकार थे स्वर्गीय डॉ. हनुमंत नायडू 'राजदीप' और संगीतकार थे श्री मलय चक्रवर्ती। पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म के अनेक गीत उस जमाने में काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें प्रसिध्द पार्श्व गायक श्री मोहम्मद रफी का गाया 'झमकत नदिया बहिनी लागय, परबत मोर मितान' भी शामिल है। रेडियो श्रोताओं के सम्मेलन में आज इस पुराने सदाबहार गीत के प्रस्तुतिकरण से एक बार फिर पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म 'कहि देबे संदेश' की यादें ताजा हो गयी।  अध्यक्षीय आसंदी से श्री लाल रामकुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन को दुर्गा महाविद्यालय रायपुर के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर अनिल कालेले, आकाशवाणी रायपुर के उदघोषक श्री श्याम वर्मा, श्री यादराम पटेल और श्री दीपक हटवार, सहित अन्य अनेक वक्ताओं ने भी सम्बोधित किया। सम्मेलन में आकाशवाणी के श्रोताओं की पसंद पर आधारित फरमाइशी फिल्मी गीतों का जीवंत प्रस्तुतिकरण आकर्षण का केन्द्र रहा, जिसमें श्रीमती वीणा ठाकुर, सुश्री मनीषा जंघेल, श्री राजकुमार गंभीर और श्री दिनेश साहू सहित अनेक श्रोता कलाकारों द्वारा नये-पुराने सदाबहार फिल्मी गीत पेश किए गए। सम्मेलन में अभनपुर निवासी प्रसिध्द हिन्दी ब्लाग लेखक श्री ललित शर्मा सहित आकाशवाणी रायपुर और विभिन्न आकाशवाणी केन्द्रों के उदघोषक तथा अनेक प्रबुध्दजन उपस्थित थे। इस मौके पर अहिंसा रेडियो श्रोता संघ बलौदाबाजार की विशेष बुलेटिन का विमोचन भी किया गया। सम्मेलन के आयोजन में अमलेश्वर रेडियो श्रोता संघ, भाटापारा रेडियो श्रोता संघ और जय छत्तीसगढ़ रेडियो श्रोता संघ पिपरिया सहित अनेक श्रोता संघों के सदस्य और पदाधिकारी भी काफी संख्या में मौजूद थे।

 

30 सितंबर, 2011

बिना ड्राइवर की कार

फिल्मों में खुद-ब-खुद चलने वाली कारें तो बहुत देखी हैं, लेकिन अगर सच में ये बन जाएं तो ड्राइवर ढूंढने की चिंता खत्म हो जाएगी। कार अपने आप चलेगी और आप आराम से बैठ कर अपनी नींद पूरी कर सकेंगे।


कारों में महारत हासिल करने वाली जर्मन कंपनी बीएमडब्ल्यू इस दिशा में काम कर रही है. म्यूनिख में प्रोजेक्ट लीडर निको केम्पशन का कहना है कि भविष्य में सभी कारें ऑटो पायलट पर चला करेंगी. रडार, लेजर और कैमरों की मदद से कारें अपना रास्ता खुद ही ढूंढ लेंगी. हालांकि इस के लिए इंतजार करना होगा, "इस तरह की तकनीक को कारों में लाना, जिस से वे रास्ता अपने आप ही ढूंढ कर चलती रहें, इसमें तो अभी काफी समय लगेगा."

 फिलहाल निको केम्पशन 'ऑप्टिमाइजिंग असिस्टेंस सिस्टम' पर काम कर रहे हैं जो कार चलाने में कई तरह से मददगार साबित हो सकता है। मौजूदा आधुनिक कारों में पार्किंग असिस्टेंट की सुविधा आम हो गई है, जिनमें आगे और पीछे सेंसर लगे होते हैं। केवल एक बटन दबाने से कार पार्किंग के लिए तैयार हो जाती है और अपने लिए जगह खोज लेती है। ड्राइवर को केवल एक्सलरेटर और ब्रेक का ध्यान रखना होता है, और छोटी से छोटी जगह में इसकी मदद से कार पार्क करना संभव हो पाता है। इस 'पार्क-असिस्ट' की कीमत तीस से साठ हजार रुपये के बीच है।

जर्मनी की तकनीकी परीक्षण संस्था कुएस के हांस गेओर्ग मार्मिट की सलाह है कि इस तरह की तकनीक में और निवेश करना चाहिए, 'कार पार्क करते वक्त गाड़ी को अगर जरा सी भी टक्कर लग जाए तो आपको अपनी कार की मरम्मत का भी खर्चा उठाना पड़ता है और जिसके साथ टक्कर हुई है उसका भी।'

बीएमडब्यू और फोल्क्सवागेन कंपनियों में इस बात पर शोध चल रहा है कि ड्राइवर के कार में बैठे बिना ही उसे किस तरह पार्क किया जा सके। इस तरह के सिस्टम से कार को ऐसी तंग जगह पर पार्क करने में मदद मिलेगी जहां पार्क करने के बाद ड्राइवर कार से बाहर नहीं निकल सकता। कार को पार्किंग से निकालने के लिए आपको बस रिमोट कंट्रोल का बटन दबाना है, कार का इंजन अपने आप शुरू हो जाएगा और कार खुद ही बाहर निकल आएगी।

हालांकि दोनों ही कंपनियां अभी भी यह बताते हुए हिचकिचा रही हैं कि इस तरह का सिस्टम बाजार में कब उपलब्ध होगा। लोगों के लिए ऐसे सिस्टम बेहद रोमांचक तो हैं, लेकिन साथ ही इस बात का डर भी है कि इस से कार पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रहेगा।