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21 जुलाई, 2011

मेरी नेपाल यात्रा (दूसरी किस्त )

विदेश की धरती पर पहला कदम




एवरेस्ट  होटल के बाहर लान की तस्वीर
हिमालय पर्वतमाला की वादियों में बसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पावन धरा नेपाल  में 9 जुलाई से 12 जुलाई 2011 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय  सहकारी सेमीनार में भाग लेने का अवसर मिला.इस सेमीनार का आयोजन राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर ने किया था . इन चार दिनों में नेपाल की प्रकृति, संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा, कृषि, पर्यटन एवं धर्म सम्बंधी अनेक जानकारी हमें मिली. नेपाल सांवैधानिक दृष्टि से एक अलग राष्ट्र है ; यहाँ का प्रधान, निशान व विधान भारत से अलग है, लेकिन रहन-सहन, बोली-भाषा और वेशभूषा लगभग एक जैसी है .नेपाल हमें स्वदेश जैसा ही प्रतीत हुआ .यह मेरी विदेश-यात्रा थी . नेपाल यात्रा की दूसरी किश्त ------


एवरेस्ट  होटल ( AVEREST HOTEL)
 राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर ( National Institute of Cooperative Banking Management & Training Bangalore  NICBMT ) के  तत्वाधान  में  आयोजित  अंतर्राष्ट्रीय सहकारी   सेमीनार में भारत से जाने वाले प्रतिभागियों को 9 जुलाई को दोपहर 12.00 बजे दिल्ली के इंदिरा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से काठमांडू के लिए रवाना होना था, सो  सुबह 10.00 बजे मैं दिल्ली एयरपोर्ट पंहुंच गया था . मेरे साथ अपेक्स बैंक रायपुर के एक अन्य संचालक श्री मिथिलेश कुमार दुबे भी थे .एयरपोर्ट के पोर्च में राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर की डायरेक्टर श्रीमती जी. शमन्ना और प्रोग्राम अधिकारी श्री  गिरीश कुमार मिले. उन्होंने हमें एक ओर बैठने का इशारा किया , जहाँ  मध्यप्रदेश, केरल, आंध्रपदेश, कर्नाटक,  पंजाब, महाराष्ट्र, गोवा और राजस्थान के प्रतिभागी वहां पहले से मौजूद थे.छत्तीसगढ़ से हम केवल दो थे . उन सबसे थोड़ा-बहुत परिचय हुआ. उसी समय बोर्डिंग और  सुरक्षा जांच के लिए जाने का संकेत हुआ. चूंकि नेपाल एक मित्र राष्ट्र  है इसीलिए वहॉं जाने के लिए वीजा व पासपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती है. लगभग सभी लोग भारत निर्वाचन आयोग का वोटर आई.डी. लेकर आये थे. प्रतिभागियों की संख्या लगभग 60 थी.  सारी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद हम सब 11.30 बजे विमान में बैठे. ठीक दोपहर  12.00 बजे किंगफिशर के विमान ने अन्तर्राष्ट्रीय विमान तल दिल्ली से काठमांडू के लिए उड़ान भरी.

फूटपाथ में किताब दूकान के चारों ओर नेपाल के युवक
ठीक  1.30 बजे  हमारा विमान काठमांडू में लैंड कर चुका था . एयरपोर्ट के बाहर निकलने से पूर्व काफी चेकिंग हुई , चूँकि हम सब ग्रुप में थे इसलिए सबको चेकिंग में एक घंटा लग गया . हम लोगों को होटल तक ले जाने के लिए एयरपोर्ट के  बाहर दो बसें खड़ी थी . अधिकांश लोग बस में बैठ गए जबकि कुछ लोग एयरपोर्ट में ही नेपाल की करेंसी और वहां की कंपनी के मोबाईल का सिम-कार्ड लेने लगे. अंततः हम लोग दोपहर 3 बजे होटल पहुंचे , हम सबके ठहरने के लिए काठमांडू के होटल एवरेस्ट में  व्यवस्था की गयी थी.किसी ने दोपहर का भोजन नहीं किया था , तकरीबन सभी लोग भूखे थे . होटल के कमरे में सामान रखकर सभी ने लगभग 4.00 बजे भोजन किया. भोजन करके मै दुबेजी के साथ बाहर बाजार की रौनक देखने निकल गया . एक पान की दूकान में पान खाया , फिर अगली दूकान में जाकर NCELL   कंपनी का सिम-कार्ड लिया . दूकानदार से इन्डियन और नेपाली करेंसी के बारे में जानकारी ली . भारत का रूपया वहां आसानी से चलता है . भारत की करेंसी का मूल्य  नेपाली करेंसी से ज्यादा है यानी भारत के सौ रुपये का मूल्य नेपाल के एक सौ   साठ  रुपये के बराबर है ; छोटे छोटे दूकानदार भी दोनों देशों के करेंसी के मूल्य के अंतर को आसानी से समझते है तथा प्रायः दोनों करेंसी में अपनी वस्तु का मूल्य बताते है . वे हिंदी अच्छी तरह समझते है तथा बोलते  भी  है . बोलने की अदा और लय में कहीं कोई अंतर नहीं है . हम दोनों काफी देर तक बाजार में घूमते रहे तथा लोगों से बात कर अपनी जिज्ञाषा शांत करते रहे .  चूँकि शाम  6 बजे  सेमिनार का शुभारंभ होना था अतः हम दोनों समय पर होटल के कांफ्रेंस हॉल में  पहुँच गए .  क्रमशः

फूटपाथ का बाजार





19 जुलाई, 2011

मेरी नेपाल यात्रा ( पहली किस्त )

नेपाल एक  हिंदू राष्ट्र है

MAP OF  NEPAL
हिमालय पर्वतमाला की वादियों में बसे प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण पावन धरा नेपाल  में 9 जुलाई से 12 जुलाई 2011 को आयोजित अन्तर्राष्ट्रीय  सहकारी सेमीनार में भाग लेने का अवसर मिला.इस सेमीनार का आयोजन राष्ट्रीय सहकारी बैंक प्रबंधन एवं प्रशिक्षण संस्थान बैंगलोर ने किया था . इन चार दिनों में नेपाल की प्रकृति, संस्कृति, रहन सहन, वेशभूषा, कृषि, पर्यटन एवं धर्म सम्बंधी अनेक जानकारी हमें मिली. नेपाल सांवैधानिक दृष्टि से एक अलग राष्ट्र है ; यहाँ का प्रधान, निशान व विधान भारत से अलग है, लेकिन रहन-सहन, बोली-भाषा और वेशभूषा लगभग एक जैसी है .नेपाल हमें स्वदेश जैसा ही प्रतीत हुआ .यह मेरी पहली विदेश-यात्रा थी . नेपाल यात्रा की पहली किश्त ------

भारत की सीमा से लगा नेपाल एक  हिंदू राष्ट्र है. यहां की आबादी लगभग 3 करोड़ है, जिसमें से 81  प्रतिशत लोग हिन्दू  है.हिन्दुओं का इतना अधिक प्रतिशत भारत में भी नहीं है. हिंदू और बौद्ध संस्कृतियों का अनूठा संगम भी नेपाल में दिखाई देता है.  यहां की संस्कृति व भारत की संस्कृति में अनेक मूलभूत समानताएं है, पड़ोसी देश होने के कारण नेपाल और भारत के बीच काफी सांमजस्य है. दोनों देशों  की नागरिकता  भले ही अलग अलग है लेकिन लोगों के आने-जाने के लिए वीजा, पासर्पोट की जरूरत नही है.नेपाल का उत्तरी हिस्सा हिमालय पर्वतमाला से घिरा हुआ है. विश्व की दस सबसे ऊँची चोटियों में से  आठ नेपाल में है. दुनिया की सबसे ऊँची चोटी एवरेस्ट भी यहीं  है .समुद्री सतह से 8848 मीटर यानी 29029 फीट ऊँचीं इस चोटी को स्थानीय लोग "सागरमाथा" कहते हैं,यह नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित है . इसके साथ ही यहाँ 20000 फीट तक की ऊँचाई वाली 240 चोटियाँ है.हिमालय की गोद में बसा नेपाल अपनी प्राचीन संस्कृति के लिए जाना जाता है और अपनी प्राकृतिक सुन्दरता  की वजह से यह पर्यटकों की पसंदीदा जगह है.नेपाल पर्यटन के लिए पर्वतारोही कमाई का एक महत्वपूर्ण जरिया है. माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के लिए नेपाल सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है . यह कृषि प्रधान देश है. यहां की मुख्य फसल धान व मक्का है ; पर यह भी सच है कि नेपाल दुनिया के सबसे ग़रीब देशों में से एक है.

 नेपाल की राजधानी  काठमांडू है. काठमांडू उपत्यका के अन्दर ललीतपुर (पाटन), भक्तपुर, मध्यपुर और किर्तीपुर नाम के नगर भी हैं अन्य प्रमुख नगरों में पोखरा, विराटनगर, धरान, भरतपुर, वीरगञ्ज, महेन्द्रनगर, बुटवल, हेटौडा, भैरहवा, जनकपुर, नेपालगञ्ज, वीरेन्द्रनगर, त्रिभुवननगर आदि है. नेपाल 14 अंचल (प्रान्त ) और 75  जिलों में विभाजित है .  क्रमशः
(my nepal tours)     

18 जुलाई, 2011

मुख्यमंत्री को किसानों ने धान से तौलकर सम्मानित किया


मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को आज रायपुर जिले में स्थित राज्य के प्रसिध्द तीर्थ चम्पारण्य प्रवास के दौरान किसानों ने धान से तौल कर सम्मानित किया। ग्रामीण सेवा सहकारी समिति चम्पारण्य के किसानों ने मुख्यमंत्री को वर्ष 2010-11 में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक चावल उत्पादन के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से प्राप्त राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। चम्पारण्य के किसान सर्वश्री बलिराम निषाद, चैतूराम यादव, विष्णु साहू, वीरेन्द्र साहू और शोभिन्द साहू सहित अनेक किसानों ने मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में यह राष्ट्रीय पुरस्कार छत्तीसगढ़ के हमारे लाखों मेहनतकश किसानों के कठोर परिश्रम को प्राप्त सम्मान है। यह पुरस्कार राज्य के सभी किसानों को समर्पित है। इस अवसर पर कृषि मंत्री श्री चन्द्रशेखर साहू, राज्य भण्डार गृह निगम अध्यक्ष श्री अशोक बजाज तथा सर्वश्री जगत प्रकाश नड्डा, रामप्रताप सिंह और रामसेवक पैकरा समेत अनेक वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री को नई दिल्ली में केन्द्रीय कृषि मंत्रालय द्वारा इस महीने की सोलह तारीख को आयोजित समारोह में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के हाथों छत्तीसगढ़ के यह राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया था।

15 जुलाई, 2011

बलिहारी गुरु आपकी





ज गुरु पूर्णिमा है , इस अवसर पर सभी गुरुओं को प्रणाम करता हूं जिनके द्वारा प्रदत्त ज्ञान रुपी प्रकाश से जीवन आलोकित हुआ . गुरु के ज्ञान से ही जीवन की इस लंबी और काँटों भरी डगर में चलना  आसान हुआ है. 

ॐ  गुरुवे   नम:


बंदऊँ गुरु पद पदुम परागा। सुरुचि  सुबास  सरस  अनुरागा॥
अमिअ मूरिमय चूरन चारू। समन सकल भव रुज परिवारू॥

 अर्थ --- मैं गुरु के चरण कमलों की रज की वन्दना करता हूँ जो सुरुचि, सुंदर, स्वाद, सुगंध तथा अनुराग रूपी रस से पूर्ण है। वह अमर मूल संजीवनी जड़ी का सुंदर चूर्ण है जो सम्पूर्ण भव रोगों के परिवार को नाश करने वाला है. 
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बलिहारी  गुरु  आपकी  घरी घरी सौ बार॥
मानुष तैं देवता किया करत न लागी बार॥


अर्थ --- मैं अपने गुरु पर प्रत्येक क्षण सैकड़ों बार समर्पित हूँ जिन्होने  मुझे बिना विलम्ब के मनुष्य से देवता कर दिया.
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गोस्वामी तुलसीदास नें भी श्री रामचरित मानस की रचना करने के पूर्व अपने गुरु की वंदना करते हुये यह सोरठा लिखा है : --------


बंदउँ  गुरु  पद  कंज  कृपा  सिंधु  नररूप हरि।
महामोह तम पुंज जासु बचन रबि कर निकर॥


अर्थ --- तुलसी दास जी नें कहा है कि मैं उन गुरु महाराज के चरणकमल की वंदना करता हूँ जो कृपा के समुद्र और नर रूप में श्री हरि ही हैं और जिनके वचन महामोह रूपी घने अन्धकार का नाश करने के लिए सूर्य किरणों के समूह हैं.
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पंडित पाढ़ि गुनि पचि मुये गुरु बिना मिलै न ज्ञान ।
ज्ञान  बिना  नहिं  मुक्ति  है  सत्त  शब्द  परनाम॥


अर्थ --- गुरु का स्थान गोविन्द से भी बढ़कर होता है. सद्गुरु के बिना तो परमार्थ की प्राप्ति हो ही नही सकती. माता पिता  तो जन्म देते हैं किन्तु वो गुरु ही है जो हम आपको को मनुष्य बनाते हैं. गुरु के बिना ज्ञान नही मिलता और ज्ञान के बिना मनुष्य पशु से बढ़कर नही. 

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गुरु  गोविन्द  दोउ  खडे ,  काके  लागूं  पाय।
बलिहारी गुरु आपनो गोविन्द दियो मिलाय॥
अर्थ ---  जब हम संशय की स्थिति में होते है तब गुरु ही हमें मार्ग बताते  है .

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श्री गुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती॥
दलन   मोह   तम  सो  सप्रकासू। बड़े   भाग  उर   आवइ   जासू॥
 अर्थ ---  श्री गुरु महाराज के चरण नखों  की ज्योति मणियो के प्रकाश के समान है जिसके स्मरण करते ही हृदय में दिव्य दृष्टि उत्पन्न हो जाती है.वह प्रकाश अज्ञान रूपी अन्धकार का नाश करने वाला है वह जिसके हृदय में आ जाता है उसके बड़े भाग्य हैं. 
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हरिहर आदिक जगत में पूज्य देव जो कोय ।
सदगुरु  की  पूजा  किये  सबकी  पूजा  होय ॥


अर्थ ---  कितने ही कर्म करो, कितनी ही उपासनाएँ करो, कितने ही व्रत और अनुष्ठान करो, कितना ही धन इकट्ठा कर लो और् कितना ही दुनिया का राज पा लो लेकिन जब तक सदगुरु के दिल का राज तुम्हारे दिल तक नहीं पहुँचता तब तक सदगुरुओं के दिल के खजाने तुम्हारे दिल तक नही उँडेले जायेंगे . इसी प्रकार जब तक तुम्हारा दिल सदगुरुओं के दिल को झेलने के काबिल नहीं बनता तब तक सब कर्म उपासनाएँ पूजाएँ अधुरी रह जाती हैं.यह  अच्छी तरह समझ लो कि  देवी  देवताओं   की पूजा के बाद भी कोई पूजा शेष रह जाती है, किंतु सदगुरु की पूजा के बाद कोई पूजा नहीं बचती.

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सत गहेए सतगुरु को चीन्हे सतनाम विश्वासा॥

कहै कबीर साधन हितकारी हम साधन के दासा॥
 अर्थ ---  प्रत्येक मानव को गुरु भक्ति और साधन का अभ्यास करना चाहिए। इस सत्य की प्राप्ति से सब अवरोध समाप्त हो जाते हैं.

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सदगुरू की महिमा अनंत, अनंत कियो उपकार ॥
अनंत   लोचन   उघडिया   अनंत  दिखावन हार॥
अर्थ --- वास्तव में गुरु की महिमा अनंत है गुरु नें मुझ पर अनेको उपकार किए है उन्होने मेरी बंद आंखो को खोलकर मुझे सत्मार्ग में चलने की प्रेरणा दी.
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  हे गुरुदेव ! आपके श्रीचरणों में अनंत कोटि प्रणाम करते हुए परमात्मा से प्रार्थना करता हूँ  कि आप जिस पद में विश्रांति पा रहे हैं , हम भी उसी पद में विशांति पाने के काबिल हो जायें अब आत्मा-परमात्मा से जुदाई की घड़ियाँ ज्यादा न रहें. ईश्वर करे कि ईश्वर से हमारी प्रीति बढ जायें तथा प्रभु करे कि गुरु-शिष्य का सम्बंध और प्रगाढ हो जायें.

गुरु  ब्रम्हा ,  गुरु  विष्णु  ,  गुरु   देवो   महेश्वर:
गुरु साक्षात् पर ब्रम्हा तस्मे श्री गुरुवे नमो नमः