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03 जून, 2011

नवतपा में प्रदेश यात्रा


हमने चिलचिलाती धूप एवं नवतपा के चलते पिछले 27 मई से 30 मई तक प्रदेश के कई हिस्से का दौरा किया तथा अनेक कार्यक्रमों में भाग लिया . प्रवास के प्रथम दिन यानी 27 मई को दुर्ग जिले के गुंडरदेही में लगभग एक करोड़ की लागत से प्रस्तावित 3600 में.ट. के गोदाम का शिलान्यास किया ,कार्यक्रम में कांकेर के सांसद श्री सोहन पोटाई एवं विधायक श्री वीरेंद्र साहू भी मौजूद थे .


दूसरे दिन यानी 28 मई को रायपुर से सारागांव , पलारी , कसडोल , गिधौरी ( शिवरीनारायण ) होते हुए बिलासपुर संभाग के जांजगीर , चांपा , सक्ती , बाराद्वार , खरसिया में राज्य भंडार निगम के सेंटरों का अवलोकन करते हुए रात्रि में रायगढ़ पहुंचें .


29 मई को घरघोड़ा , लोहरसिंग सेंटरों का अवलोकन कर रायगढ़ में भाजयुमों द्वारा आयोजित घोटालों की बारात में शामिल हुए तत्पश्चात रायगढ़ से निकल कर रात में सारंगढ़ जाकर विश्राम किये .


दिनांक 30 मई को सुबह सारंगढ़ गोदाम का निरीक्षण कर महासमुंद जिले के सरायपाली , बसना एवं पिथौरा केन्द्रों का अवलोकन कर रायपुर जिले के आरंग कार्यालय में रुके तथा रात 11  बजे रायपुर वापस लौट आये .

सारंगढ़ के पदाधिकारियों के साथ










02 जून, 2011

आधुनिक बच्चों का टूट रहा है कुदरत से नाता

जैव विविधता को बचाने के काम को वे बच्चे और मुश्किल बना रहे हैं जो टेलीविजन, इंटरनेट, विडियोगेम्स या दूसरे इलेक्ट्रॉनिक मनोरंजन की गिरफ्त में हैं. संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि ये सब  प्रकृति  को   बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं.

 

संयुक्त राष्ट्र के एक अधिकारी ने कहा है कि ज्यादातर नौजवान शहरों में रहते हैं और कुदरत से उनका नाता टूटा हुआ है, इसलिए वे ईकोसिस्टम और प्रजातियों की सुरक्षा की अहमियत नहीं समझते. जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र के कार्यकारी सचिव अहमद जोगलाफ ने कहा, "हमारे बच्चे कंप्यूटरों से चिपके रहते हैं. वे एस.एम.एस. विडियोगेम्स और टीवी की गिरफ्त में हैं. वे एक आभासी दुनिया में जी रहे हैं. हमें उन्हें दोबारा कुदरत से जोड़ना होगा."

मनीला में दक्षिणपूर्वी एशियाई जैव विविधता फोरम में बोलते हुए जोगलाफ ने कहा, "वे नहीं देखते कि आलू कैसे उगाया जाता है. वे तो बस आलू को सुपरमार्केट में ही रखा देखते हैं.

जोगलाफ ने कई सर्वेक्षणों के हवाले से कहा कि विकसित देशों में 95 फीसदी बच्चे अपना खाली वक्त टीवी या कंप्यूटर के सामने बिताते हैं और सिर्फ पांच फीसदी बच्चे बाहर जाते हैं. एक अन्य सर्वे के मुताबिक 20 फीसदी अमेरिकी बच्चे कभी पेड़ पर नहीं चढ़े.

जोगलाफ का कहना है कि शिक्षा की कमी कुदरत के संरक्षण की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है. उन्होंने यूरोप में 2009 में हुए एक सर्वे का जिक्र किया, जिसमें पता चला कि 60 फीसदी जनता को जैव विविधता शब्द के मायने ही नहीं पता थे. उन्होंने पूछा, "जिस चीज को आप जानते ही नहीं, उसकी रक्षा कैसे करोगे? आप उस चीज की रक्षा कैसे करोगे जिसे आपने कभी देखा ही नहीं?"

 dwhindi   

पाक : पत्रकारों के लिए बेहद ख़तरनाक - 02


पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में पत्रकार सलीम शहजाद की हत्या के बाद सरकार ने मीडियाकर्मियों को सुरक्षा के लिए हथियार रखने की इजाजत दे दी है. यानी पाकिस्तान में कलम को बन्दूक के सहारे की जरूरत पड़ रही है . पहले यह कहावत थी कि कलम की ताकत बन्दूक से ज्यादा होती है लेकिन अब कलम की धार कमजोर होती दिखाई पड़ रही है .

 इसके पूर्व हमने दिनांक 17.12.2010 को " पाक : पत्रकारों के लिए बेहद ख़तरनाक " शीर्षक से प्रकाशित लेख में लिखा था कि ‘कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ ने कहा है कि आत्मघाती हमलों में बढ़ौतरी के कारण पाकिस्तान पत्रकारों के लिए दुनिया का सब से ख़तरनाक देश बन गया है.सीपीजे ने अपनी ताज़ा रिपोर्ट में बताया है कि इसी साल दुनिया में 42 पत्रकारों की मौत हुई जिन में से सब से ज़्यादा पाकिस्तान में मारे गए और इस क्रम में इराक़ दूसरे स्थान पर है.


परन्तु पत्रकार सलीम शहजाद की हत्या आतंकवादियों द्वारा नहीं हुई है . उनकी हत्या में स्वयं पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी आई.एस.आई. के हाथ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है ,. पाकिस्तान में ह्यूमन राइट्स वॉच के प्रतिनिधि अली देयन हसन का कहना है कि सलीम शहजाद को पाकिस्तान की गुप्तचर संस्थाओं की ओर से धमकी दी जा रही थी. समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में हसन ने कहा, ''उन्होंने मुझे बताया था कि उनका पीछा किया जा रहा है और कोई लोगों से उन्हें धमकी भरे फोन भी मिल रहे हैं.'' हसन ने कहा, ''हम यह विश्वास से नहीं कह सकते कि सलीम शहजाद की हत्या किसने की है. लेकिन हम यह अवश्य कह सकते हैं कि आई.एस.आई. पहले भी इस तरह के कामों में शरीक रही है.''


41 वर्षीय सलीम शहजाद हॉन्ग कॉन्ग स्थित एशिया टाइम्स ऑनलाइन के लिए पाकिस्तान में ब्यूरो चीफ के तौर पर काम करते थे. रविवार रात वह अपने घर के पास से उस समय लापता हो गए, जब वह निजी टीवी चैनल 'दुनिया न्यूज' के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जा रहे थे. दो दिन बाद उनकी लाश मिली . इस घटना से पूरा मिडिया जगत स्तब्ध है .


31 मई, 2011

सावधान : जान लेवा है ई-हैक बैक्टीरिया


विश्व भर के लोगों को अब ई-हैक बैक्टीरिया के संक्रमण का भय सताने लगा है .यह ईहैक बैक्टीरिया ना केवल मनुष्य बल्कि संपूर्ण प्राणी जगत के लिए जान लेवा साबित हो रहा है .

यह कितनी बड़ी विडम्बना है कि जिन खाद्य पदार्थो को हम जीवन रक्षक मानतें है उन पदार्थों के माध्यम से हम मौत को आमंत्रित कर रहें है . टमाटर और खीरा तो हमारे भोजन का जायका बढ़ाता है लेकिन ना जाने अब क्यों वह आदमी के लिए जहर बन गया है .

जर्मनी में लोगों को खीरा व टमाटर का सेवन ना करने की चेतावनी दी गई है . टमाटर, खीरे और कुछ अन्य सब्ज़ियों के ज़रिए ई-हैक बैक्टीरिया का संक्रमण लोगों के शरीर में पहुँच रहा है . अब तक इस संक्रमण की वजह से 14 लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग बीमार हो गए हैं.स्पेन के तटीय इलाकों से आने वाले खीरों में ई-हैक बैक्टीरिया है जो अब पूरे यूरोप में फैल रहा है.ईहेक या ईएचईसी का पूरा नाम एंटेरो हीमोरेजिक एश्चेरेशिया कोली(Antero Himorejika Cscheareshia coli)  है.

स्वीडन, डेनमार्क, हॉलैंड और ब्रिटेन में भी ईहेक से संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं. सोमवार को पोलैंड में एक महिला को नाजुक हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. महिला जर्मनी के शहर हैम्बर्ग से वापस लौटी. हैम्बर्ग में अब तक 450 लोग ईहेक से संक्रमित हैं.

ऑस्ट्रिया और चेक गणराज्य में भी प्रशासन ने स्पेन से आई सब्जियों को बाजार से हटा दिया है.  चेक गणराज्य के अधिकारियों का अनुमान है कि संक्रमित खीरे हंगरी और लक्जमबर्ग भी भेजे गए हो .स्पेन में ईहेक फैलान वाले दो ग्रीन हाउसों की पहचान कर ली गई है. दोनों को बंद कर दिया गया है.

ई-हेक संक्रमण के लक्षण:

यह जीवाणु सीधा पाचन तंत्र पर हमला करता है. संक्रमित रोगी के पेट में जहरीले तत्व बनने लगते हैं. ये जहरीले तत्व खून में मौजूद लाल रुधिर कणिकाओं को खत्म करने लगते हैं. ऐसा होने पर गुर्दे नाकाम होने का खतरा पैदा जाता है. कई मामलों में इंसान का स्नायु  तंत्र (नर्व सिस्टम) नाकाम हो जाता है.

अब तक माना जाता रहा कि हेक विषाणु सिर्फ पांच साल से कम उम्र के बच्चों को निशाना बनाने में सक्षम रहता है. लेकिन ताजा मामले में 90 फीसदी रोगी वयस्क है. इनमें से दो तिहाई महिलाएं हैं.