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11 नवंबर, 2010

आज हम यहाँ है

      आज हम यहाँ है ..........  यह  शीर्षक  आपको जरूर अटपटी लग रही होगी ,लेकिन यह समाचार पढ़ कर आप खुद समझ जायेंगे .यह कतरन है आज के लोकप्रिय हिंदी दैनिक " हरिभूमि "  का  जिसमें इस ब्लॉग के एक पोस्ट पर रिपोर्ट प्रकाशित की है  . विस्तृत विवरण के लिए अगली पोस्ट का इंतजार करें . धन्यवाद .  



लोकप्रिय हिंदी दैनिक " हरिभूमि "  11-11-2010


फिर बौखलाया पाक

पाकिस्तान सरकार ने सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत को अमेरिका द्वारा समर्थन दिए जाने की निंदा की है. इतना ही नहीं राष्ट्रीय कैबिनेट के स्तर पर प्रस्ताव पास कर उसे समझ के बाहर बताया है.

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है कि संघीय सरकार ने एक प्रस्ताव पास कर "संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट के लिए भारत को समर्थन देने के अमेरिका के फैसले पर गंभीर चिंता और तीव्र असंतोष व्यक्त किया है."प्रस्ताव में कहा गया है कि यह समझ से बाहर है कि अमेरिका उस भारत को समर्थन दे रहा है जिसकी संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन में धुंधली साख है.
प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक द्वारा पास प्रस्ताव में भारत पर जम्मू कश्मीर पर सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव की अवहेलना करने और कश्मीरी जनता के मानवाधिकारों का व्यवस्थित हनन करने का आरोप लगाया गया है.


इस सप्ताह अपने भारत दौरे पर संसद को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने पुनर्गठित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के रूप में भारत का स्वागत करने की बात कही थी.

10 नवंबर, 2010

अमरीका के बाद चीन भी झुका ,पाकिस्तान में खलबली

    

    अमरीका द्वारा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता की पैरवी करने के बाद अब चीन ने भी अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन किया है .जबकि पडोसी देश पाकिस्तान में इससे खलबली गई मची हुई है .

चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और संयुक्त राष्ट्र में भारत की बड़ी भूमिका निभाने की आकांक्षा समझता है और भारत के साथ-साथ अन्य सदस्यों के साथ सुरक्षा परिषद के सुधारों पर चर्चा के लिए तैयार है.ग़ौरतलब है कि सुरक्षा परिषद के पाँच स्थाई सदस्यों में से केवल चीन ही है जिसने अब तक स्पष्ट तौर पर भारत की स्थाई सदस्यता का अनुमोदन नहीं किया है.

दूसरी ओर पाकिस्तान ने भारत की स्थाई सदस्यता के प्रश्न पर अमेरिकी रूख का विरोध करते हुए कहा कि "  ये  अनुमोदन संयुक्त राष्ट्र की सुधार प्रक्रिया को और जटिल बनाता है. ऐसा सुधार जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मूल सिंद्धांतों और संप्रभुता में बराबरी के सिद्धांत का उल्लंघन करता हो  ; सामूहिक सुरक्षा का उल्लंघन करता हो उससे अंतरराष्ट्रीय संबंधो को आघात पहुँचेगा. "
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने नईदिल्ली में भारतीय संसद को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का अनुमोदन किया था.

08 नवंबर, 2010

भारत बन चुका है ग्लोबल पावर : ओबामा


अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है कि भारत एक उभरती हुई ताकत नहीं है बल्कि ग्लोबल पावर बन चुका है.ओबामा ने भारतीय संसद को संबोधित करते समय भारत के प्रति अपने प्रेम का खूब इजहार किया. अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को अपने संबोधन में हिंदी के शब्द 'बहुत धन्यवाद' और 'जय हिंद' कहते हुए देश के प्राचीन ज्ञान, इतिहास की समझ एवं सांस्कृतिक विविधता के लिए भारतीयों की सराहना की।

 ओबामा ने लगभग 45 मिनट के भाषण में भारत की सभ्यता संस्कृति से लेकर हर क्षेत्र में उसकी तरक्की की जमकर तारीफ की. भारत में शून्य से सुपर कंप्यूटर तक के आविष्कार का हवाला देकर ओबामा ने भारत को विश्व शक्ति करार दिया.इसे उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार और इसमें स्थाई सदस्यता के भारत के दावे को सही ठहराने की दलील के तौर पर भी इस्तेमाल किया.साथ ही चीन का नाम लिए बगैर उन्होंने इसे सुरक्षा परिषद में शक्ति संतुलन के पक्ष में भी बताया.

ओबामा ने कहा "मुझे आने वाले कुछ सालों में सुरक्षा परिषद में सुधार की पूरी उम्मीद है और इसी के बलबूते मैं इसमें भारत के स्थाई सदस्य के रूप में मौजूद होने की उम्मीद करता हूं."

भारत सरकार ने सुरक्षा परिषद में समर्थन के लिए दिए गए ओबामा के वक्तव्य को सराहनीय पहल बताया है. इसके अलावा विपक्षी पार्टी बीजेपी ने भी इसकी सराहना की है. पार्टी के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने ओबामा की भारत यात्रा को सफल बताया.

ओबामा ने एशिया के 10 दिवसीय दौरे की शुरुआत भारत से की है. यात्रा के अंतिम चरण में भारतीय संसद के दोनों सदनों की संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते समय ओबामा ने भारत के महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद वह पहली बार किसी देश की तीन दिन की यात्रा कर रहे हैं.

ओबामा ने भारत की साझी सांस्कृतिक विरासत, समन्वयवादी सभ्यता और आजादी के बाद हर क्षेत्र में की गई तरक्की को दुनिया के लिए अनुकरणीय बताया. उन्होंने कहा कि इसी वजह से वह भारत के प्रशंसक हैं. उन्होंने भारत की आजादी के बाद महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलने को उसकी ताकत और तरक्की का मूल स्रोत बताया.  ओबामा ने कहा कि गांधी दर्शन दुनिया में शांति और समग्र विकास का ऐसा सूत्र है जो दुनिया की बेहतर तस्वीर बना सकता है.

इसके अलावा उन्होंने रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए भारत और अमेरिका की आपसी भागीदारी को आगे बढ़ाने पर जोर दिया. ओबामा ने कहा कि इसके लिए अमेरिका ने भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए परमाणु सहयोग समझौता किया है.इससे दोनों देशों के लिए रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो सकेंगे.

ओबामा ने अभिभाषण में अपने आदर्श महात्मा गांधी का जिक्र पांच बार किया और भारत का नाम 61  बार लिया।

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                                      "अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे "