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28 अक्तूबर, 2010

ब्रिटेन में दिवाली और छत्तीसगढ़ में राज्योत्सव

दिवाली अभी दस दिन बाकी है लेकिन ब्रिटेन के भारतीयों ने दिवाली मना भी लिया .भारत देश के छत्तीसगढ़ प्रान्त में राज्योत्सव की धूम मची थी वहीं ब्रिटेन के एक गांव में करीब 40 हजार लोग बॉलीवुड संगीत, समोसे और भारतीय संस्कृति का आनंद उठाने इकट्ठा हुए. दिवाली के पहले किए गए इस समारोह में बाकायदा आतिशबाजी भी की गई. जबकि 38 साल पहले भारतीयों को यहां पसंद नहीं किया जाता था .

     1972 में जब पहली बार भारतीय युगांडा से यहां पहुंचे तो उनका यहां किसी तरह का स्वागत नहीं हुआ, बल्कि वह एक तरह से यहां अवांछित थे. लेकिन 38 साल बाद यहां का माहौल दिवाली के रंगों में सजा था और भारत के गरमा गरम समोसों और खाने की खुशबू से महक रहा था. कुल 40 हजार लोग भारतीय संस्कृति का आनंद उठाने इकट्ठा हुए.भारत के बाहर दिवाली का इतना बड़ा समारोह अमेरिका में ही शायद ही होता होगा .

लाइसेस्टर दिवाली के रंगों में रंगा था. बेलग्रेव रोड पर साढ़े छह हजार रंग बिरंगे आकाश दीये चमक रहे थे. 1972 में इन आप्रवासियों को इलाके के लिए खतरा माना जा रहा था और आज यहाँ की परिषद के मुखिया विजय पटेल हैं. उन्होंने कहा, "हम लाइसेस्टर की दिवाली समारोह पर बहुत गर्व महसूस करते हैं. पिछले 27 साल से यह सिलसिला चला आ रहा है और हर साल यह बड़ा होता जा रहा है. हजारों लोग इस समारोह का आनंद उठाने आते हैं . समारोह की वजह से रास्ते जम हो जाते है .जानकारों का कहना है कि 2011में लाइसेस्टर ब्रिटेन का पहला शहर होगा जहां ज्यादातर विदेशी मूल के लोग होंगे. DW 00296




26 अक्तूबर, 2010

भविष्यवक्ता ऑक्टोपस यानी पॉल बाबा का निधन


ऑक्टोपस यानी " पॉल बाबा " का  कल  रात अचानक निधन हो गया . फुटबॉल  वर्ल्ड कप के विभिन्न मैचों की सही भविष्यवाणी कर सुर्खियों में आने वाले जर्मनी के ऑक्टोपस पॉल अब नहीं रहे . अपनी सही भविष्यवाणियों के चलते शोहरत के मामले में उसने वर्ल्ड कप को भी पीछे छोड़ दिया था ." पॉल का जलवा फ़ुटबॉल विश्व कप के दौरान किसी स्टार से कम नहीं था.

सफल भविष्यवक्ता
ऑक्टोपस यानी पॉल बाबा

पॉल ने वर्ल्ड कप मैचों की सही भविष्यवाणी कर दुनिया को हैरान कर दिया था .भविष्यवाणी के लिए पॉल के बॉक्स में उन दोनों देशों के झंडे रखे जाते थे जिनके बीच मैच होना था.  पॉल उनमें से एक को चुन कर विजेता की भविष्यवाणी करता था.

दक्षिण अफ्रीका में हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप में जर्मनी के सभी आठ मैचों के बारे में ऑक्टोपस की भविष्यवाणियां सही निकलीं  थी  .  फिर स्पेन और हॉलैंड के बीच फ़ाइनल मैच से पहले   पॉल बाबा ने अपने एक्वेरियम में स्पेन का झंडा चुनकर ये भविष्यवाणी की थी कि मैच स्पेन जीतेगा .कड़े मुकाबले में स्पेन की 1-0 से जीत हुई , जिससे उसकी विश्वसनीयता और बढ़ गई थी .
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जर्मनी के एक्वेरियम "ओबरहॉसन सी लाइफ सेंटर "  के  अधिकारी व कर्मचारी इस घटना से बेहद दुखी है . पॉल के ' पार्थिव अवशेष ' को फिलहाल कोल्डस्टोरेज में रखा गया है .  प्रबंधकों को अब यह तय करना है कि  कितने भव्य तरीके से पॉल का अंतिम संस्कार किया जाए.  लेकिन पॉल के चाहने वालों को ज्यादा निराश होने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह एक्वेरियम पॉल बाबा के उत्तराधिकारी के रूप में एक दूसरे ऑक्टोपस को तैयार कर रहा है .नया ऑक्टोपस सफल भविष्यवक्ता बन सकेगा अथवा नहीं यह जानने के लिए हमें अगले फुटबॉल वर्ल्ड कप की प्रतीक्षा करनी होगी .
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मैंने 12   जलाई 2010 को एक पोस्ट लिखी थी इसे जरूर पढ़े -- विश्व कप के भविष्यवक्ता पॉल बाबा स्वंय का भविष्य तो बतायें......  00327




25 अक्तूबर, 2010

रविवार को बदल जाएगा वक्त


           अक्तूबर इस साल का सबसे लंबा महीना होगा. इसी महीने दुनिया के बहुत सारे देश अपनी अपनी घड़ियां एक घंटा पीछे करेंगे.हर साल अक्टूबर के आखिरी रविवार को समय पीछे होता है और मार्च में फिर से घड़ियां घंटे भर आगे कर दी जाती हैं.
         रूस में स्टेट मेट्रोलॉजी सेंटर के विशेषज्ञ बताते हैं कि साल में दो बार घड़ियों को आगे पीछे किया जाता है. विशेषज्ञों के मुताबिक,  "बसंत की शुरुआत में घड़ियां एक घंटा आगे की जाती हैं और पतझड़ में एक घंटा पीछे. आमतौर पर ऐसा मार्च और अक्तूबर के आखिरी रविवार को किया जाता है."
         यह तरीका स्कॉटलैंड में पैदा हुए कनाडा के एक इंजीनियर सैनफोर्ड फ्लेमिंग ने ईजाद किया था. फ्लेमिंग ने दुनिया को टाइम जोन में बांटने का प्रस्ताव दिया. 1883 में उनके इस प्रस्ताव को अमेरिका का समर्थन मिला. 1884 में वॉशिंगटन डीसी में एक समझौता हुआ जिसके तहत 26 देशों ने टाइम जोन को मान लिया.
         टाइम जोन दरअसल धरती के क्षेत्र हैं जहां एक जैसा वक्त रहता है. फ्लेमिंग के प्रस्तावों को मंजूरी मिलने के बाद हर टाइम जोन का अपना वक्त हो गया. इसे स्थानीय समय कहा जाता है.
        मौसम के हिसाब से इन टाइम जोन में बदलाव किया जाता है. दिन में रोशनी के मुताबिक वक्त को एक घंटा आगे या पीछे कर लिया जाता है. इस प्रक्रिया को डे लाइट सेविंग टाइम या समर टाइम जोन कहते हैं. यह प्रस्ताव अमेरिकी विचारक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने दिया था.
      अब टाइम जोन समझौते के मुताबिक 192 में से 110 देश साल में दो बार अपनी घड़ियां आगे या पीछे करते हैं.DW  

"बचपन और हमारा पर्यावरण"

"बचपन और हमारा पर्यावरण"

      पर्यावरण जागरूकता कार्यक्रम को गति प्रदान करने के लिए एक लेख प्रतियोगिता का आयोजन किया गया है,इसमें आप भी सक्रीय भागीदारी निभा सकते है .प्रतियोगिता  में भाग लेने के लिए यहाँ क्लिक करें.इस आयोजन के लिए श्री ललित शर्मा बधाई के पात्र है . 00347