ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है * * * * नशा हे ख़राब झन पीहू शराब * * * * जल है तो कल है * * * * स्वच्छता, समानता, सदभाव, स्वालंबन एवं समृद्धि की ओर बढ़ता समाज * * * * ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है

25 अक्तूबर, 2010

अब खुलेंगे ब्रह्मांड के दरवाजे


            ब्रह्मांड में कहीं छिपी हुई एक अनजानी दुनिया, जिसका अभी तक पता नहीं है. ये अब तक साइंस फिक्शन लिखने वालों के काम की चीजें रही हैं. लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद हैं कि अगले साल तक इस सिलसिले में ठोस धारणाएं पेश करेंगे.
यही है महाट्यूब
     परमाणु अनुसंधान के लिए यूरोपीय संगठन, फ्रांसीसी अक्षरों के मुताबिक इसे सैर्न कहा जाता है. फ्रांस और स्विट्जरलैंड की सीमा पर जूरा पहाड़ियों की घाटी में इसके केंद्र में सैकड़ों वैज्ञानिक काम कर रहे हैं. यहां 10 अरब डॉलर की लागत से एक प्रयोग शुरू किया गया था, जिसे लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर या एलएचसी कहा जाता है. भौतिक शास्त्रियों की भाषा में यह न्यू फिजिक्स का प्रयोग है, जिसके आधार पर ब्रह्मांड के बारे में अब तक प्रचलित मान्यताएं पूरी तरह से बदलनी पड़ेंगी.
       आम बोलचाल की भाषा में इसे महाप्रयोग का नाम दिया गया है. सैर्न के वैज्ञानिकों का कहना है कि समानांतर दुनिया, पदार्थ के अज्ञात रूप, अतिरिक्त आयाम - ये अब साइंस फिक्शन के विषय नहीं रह जाएंगे, बल्कि फिजिक्स के ठोस सिद्धांत बनेंगे, जिन्हें एलएचसी और इस तरह के अन्य प्रयोगों के जरिये प्रमाणित किया जाएगा.
ब्रह्मांड की खोज
       अंतरराष्ट्रीय शोधकर्ताओं के इस तथाकथित थ्योरी ग्रुप में इस बात पर विचार किया जा रहा है कि टेलिस्कोप की पहुंच के बाहर क्या क्या हो सकता है, जैसा कि सैर्न के इस महीने के बुलेटिन में कहा गया है. बुलेटिन के एक लेख में बताया गया है कि एलएचसी की भूमिगत प्रयोगशाला में लगातार बढ़ाई जा रही ऊर्जा के साथ कणों के बीच टकराव की स्थिति पैदा की जा रही है,  जैसा कि ब्रह्मांड में हुआ करता है.  इनके नतीजों को कंप्यूटर के जरिये परखा जाएगा.
        केंद्र के महानिदेशक रोल्फ हॉयर ने पिछले सप्ताहांत बताया कि जमीन के नीचे 27  किलोमीटर लंबी सुरंग में अक्टूबर के मध्य में प्रोटोन के कण 50 लाख प्रति सेकंड की दर से आपस में टकराए जा रहे हैं.  यह योजना से दो सप्ताह पहले संपन्न हुआ है. और अगले साल घर्षण की गति अब तक अज्ञात आयाम तक बढ़ाई जाएगी, और उनसे प्राप्त हो सकने वाली सूचनाएं वैज्ञानिकों की अब तक की सारी धारणाओं को बदल सकती हैं. सिर्फ़ प्रकाश की गति इस घर्षण की गति से अधिक है.  इनके जरिये उसका एक नमूना तैयार किया जाएगा, आज से लगभग 13.7 अरब वर्ष पहले बिग बैंग के बाद एक सेकंड के एक छोटे से हिस्से में जो कुछ हुआ था.
         सदियों के निरीक्षण और प्रयोग के बाद भी अभी तक ब्रह्मांड के लगभग 4 प्रतिशत के बारे में ही कुछ जानकारी मिल सकी है. उसके बाहर जो कुछ है, उसे डार्क मैटर या डार्क एनर्जी कहा जाता है, क्योंकि वह पूरी तरह से अज्ञात है.
          सैर्न के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन महाप्रयोगों के नतीजे के रूप में उन्हें ऐसे आयामों के संकेत मिलेंगे, जो लंबाई, चौड़ाई, गहराई और समय से परे होंगे, क्योंकि उर्जा के कणों को इन चारों आयामों से परे तक गायब होते पाया जाएगा और वे फिर से इन चार आयामों की परिधि में लौट आएंगे. DW 00344

24 अक्तूबर, 2010

हर व्यक्ति का अब अलग पहचान नंबर ( UID )

चमारिन बाई को मिला पहला यू.आई.डी. कार्ड

देश के हर व्यक्ति का अब अलग पहचान नंबर होगा जिसे यू . आई . डी . नाम दिया गया  है .यह अनोखी राष्ट्रीय परियोजना है,जो नेशनल आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित है .  हर व्यक्ति का पहचान नंबर बारह अंकों का होगा . 
पूरे देश में एक जैसे पहचान पत्र जारी करने की इस योजना पर तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने हैं.यह योजना मार्च 2014 तक चलेगी और तब तक देश के हर नागरिक को आधार संख्या दे दी जाएगी.एक जैसे पहचान पत्र और पहचान संख्या देने का मकसद देश के सभी लोगों को विकास की प्रक्रिया में शामिल करना है. आधार संख्या के जरिए सरकार उन लोगों की पहचान को आसान बनाना चाहती है जो विकास की रफ्तार में पीछे छूट जाते हैं. इसके अलावा प्रशासन को बेहतर बनाने और लोगों तक आसानी से सारी सुविधाएं पहुंचाने में भी यह पहचान पत्र काम आएगा. छात्रवृत्ति, राशन कार्ड, पासपोर्ट आदि के लिये यह उपयोग में लाया जा सकेगा .
 छत्तीसगढ़ में आज से  नागरिकों को विशेष पहचान संख्या  UID   देने का काम शुरू हो गया है .रायपुर जिले के गरियाबंद के ग्राम पंचायत जोबा की चमारिन बाई को इस परियोजना के तहत राज्य का पहला यू.आई.डी कार्ड धारी होने का गौरव प्राप्त हुआ .स्वयं मुख्य मंत्री डा. रमन सिंह ने ग्राम जोबा के स्टाल में जाकर अपना  यू . आई . डी . बनवाया .  



23 अक्तूबर, 2010

छत्तीसगढ में सहकारिता के माध्यम से चमका किसानों का भाग्य

छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के 10 वर्ष पूर्ण होने पर विशेष

सहकारी आंदोलन का   विस्तार

त्तीसगढ़ राज्य का गठन सहकारिता के लिए वरदान सिद्ध हुआ है। इन 10 वर्षों में सहकारी आंदोलन के स्वरूप में काफी विस्तार हुआ है। प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से फसल ऋण लेने वाले किसानों की संख्या जो वर्ष 2000-01 में 3,95,672 थी,जो वर्ष 2009-10 में बढ़कर 7,85,693 हो गई है। इन 10 वर्षों में 3 प्रतिशत ब्याज दर पर कृषि ऋण उपलब्ध कराने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य बना। छत्तीसगढ़ में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन का जिम्मा सहकारी समितियों को दिया गया है , सभी उपार्जन केन्द्रों को कम्प्यूटरीकृत किया गया है जो कि अपने आप में छत्तीसगढ़ शासन की बहुत बड़ी उपलब्धि है। उपलब्धियों की दास्तान यही खत्म नहीं होती,यह बहुत लंबी है। शासन ने प्रो.बैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू कर मृतप्राय समितियों को पुनर्जीवित किया है,इस योजना के तहत सहकारी समितियों को 225  करोड़ की सहायता राशि प्रदान की गई है। इस योजना को लागू करने के लिए 25.09.2007 को राज्य शासन,नाबार्ड एवं क्रियान्वयन एजेन्सियों के मध्य एम.ओ.यू हुआ। इससे प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को प्राणवायु मिल गया है।

रासायनिक खाद  वितरण -
प्रदेश में कृषि साख सहकारी समितियों की संख्या 1333 है, जिसमें प्रदेश के 18 जिलों के सभी 20796 गांवों के 22,72,070 सदस्य हैं। इनमें से 14,39,472 ऋणी सदस्य हैं। इन समितियों के माध्यम से चालू वित्तीय वर्ष में खरीफ फसल के लिए 3  प्रतिशत ब्याज दर पर 896.41  करोड़ रूपिये का ऋण वितरित किया गया है। छत्तीसगढ राज्य निर्माण के समय वर्ष 2000-01 में मात्र 190 करोड रूपिये का ऋण वितरित किया गया था जो अब 4 गुणा से अधिक हो गया है। ऋण के रूप में किसानों को इस वर्ष 5,29,309  मिट्रिक टन रासायनिक खाद का वितरण किया गया है।

 3 प्रतिशत ब्याज -
अल्पकालीन कृषि ऋण पर ब्याजदर पूर्व में 13 से 15 प्रतिशत था। वर्ष 2005-06 से ब्याजदर को घटाकर 9 प्रतिशत किया गया। वर्ष 2007-08 में 6 प्रतिशत ब्याज दर निर्धारित किया गया। 2008-09 से प्रदेश के किसानों को तीन प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। शासन की नीति के तहत सहकारी संस्थाओं द्वारा गौ-पालन,मत्स्यपालन एवं उद्यानिकी हेतु भी 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जा रहा है।

किसान क्रेडिट कार्ड -
किसानों की सुविधा के लिए सहकारी समितियों में किसान क्रेडिट कार्ड योजना लागू की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से कृषक सदस्यों को 5 लाख रूपिये तक के ऋण उपलब्ध कराये जा रहे है। कुल 14,39,472 क्रियाशील सदस्यों में से 11,86,413 सदस्यों को अब तक किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराये जा चुके है जो कि कुल क्रियाशील सदस्यों का 80 प्रतिशत है।

 महिला स्व सहायता समूह -
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए स्व सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है। अब तक 20140 समूहों का गठन किया गया है जिसमें 2,41,722  महिला शामिल है। इन समूहों को सहकारी बैंकों के माध्यम से 10 करोड़ 10 लाख रू. की ऋण राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। इसी प्रकार बैंको के माध्यम से 90 कृषक क्लब गठित किये गये है।

प्रो. बैद्यनाथन कमेटी की सिफारिश -
छत्तीसगढ शासन ने प्रो.बैद्यनाथन कमेटी की सिफारिशों को लागू कर राज्य में अल्पकालीन साख संरचना को पुनर्जीवित करने की दिशा में ठोस कदम उठाया है इसके तहत दिनांक 25 सितंबर 2007 को केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और नाबार्ड के बीच एम.ओ.यू हुआ। त्रि-स्तरीय समझौते के तहत् प्रदेश के 1071 प्राथमिक कृषि साख समितियों को 193.96 करोड़ रूपिये 5 जिला सहकारी केन्द्रीय बैकों को कुल 21.56  करोड़ रूपिये तथा अपेक्स बैंक को 9.49 करोड़ रूपिये की राहत राशि आबंटित की जा चुकी है।

धान खरीदी -
सहकारी समितियों के माध्यम से शासन द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान खरीदी की व्यवस्था की गई है। इसके लिए शासन द्वारा लगभग 1550 उपार्जन केन्द्र स्थापित किये गये है। वर्ष 2009-10 में समितियों के माध्यम से 44.28 लाख मिट्रिक टन धान की खरीदी गई। जबकि छत्तीसगढ राज्य निर्माण के समय वर्ष 2000-01 में मात्र 4.63 मिट्रिक टन , 2001-02 में 13.34 लाख मिट्रिक टन, 2002-03 मे 14.74 लाख मिट्रिक टन , 2003-04 में 27.05 लाख मिट्रिक टन, 2004-05 में 28.82 लाख मिट्रिक टन, 2005-06 में 35.86 लाख मिट्रिक टन  , 2006-07 में 37.07 लाख मिट्रिक टन , 2007-08 में 31.51 लाख मिट्रिक टन, 2008-09 में 37.47 लाख मिट्रिक टन धान की खरीदी की गई थी। गत वर्ष 44.28 लाख मिट्रिक टन धान खरीद कर छत्तीसगढ़ सरकार ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

धान खरीदी केन्द्र  आन लाईन - 
 शासन द्वारा स्थापित 1550 धान खरीदी केन्द्रों को आन लाईन किया गया है, जिसकी सराहना देशभर में हुई है। धान उपार्जन केन्द्रों के कम्प्यूटराईजेशन से खरीदी व्यवस्था में काफी व्यवस्थित हो गई है। इससे पारदर्शिता भी आई है। किसानों को तुरंत चेक प्रदान किया जा रहा है। किसानों का ऋण अदायगी के लिए लिकिंग की सुविधा प्रदान की गई है। इससे सहकारी समितियां भी लाभान्वित हो रही है, क्योंकि लिकिंग के माध्यम से ऋण की वसूली आसानी से हो रही है।

भूमिहीन कृषकों को  ऋण प्रदाय -
सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों को टैक्टर हार्वेस्टर के अलावा आवास ऋण भी प्रदाय किया जा रहा है। नाबार्ड के निर्देशानुसार अब ऐसे भूमिहीन कृषकों को भी ऋण प्रदाय किया जा रहा है जो अन्य किसानों की भूमि को अधिया या रेगहा लेकर खेती करते है। छत्तीसगढ़ की यह प्राचीन परंपरा है। जब कोई किसान खेती नहीं कर सकता अथवा नहीं करना चाहता तो वह अपनी कृषि योग्य भूमि को अधिया या रेगहा में कुछ समय सीमा के लिए खेती करने हेतु अनुबंध पर दे देता है। चूंकि अधिया या रेगहा लेकर खेती करने वाले किसानों के नाम पर जमीन नहीं होती इसलिए उन्हें समितियों से ऋण नहीं मिल पाता था, लेकिन ऐसे अधिया या रेगहा लेने वाले किसानों का ”संयुक्त देयता समूह” बना कर सहकारी समितियों से ऋण प्रदान करने की योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत अकेले रायपुर जिले में चालू खरीफ फसल के लिए 61 समूह गठित कर 8.24 लाख रूपिये का ऋण आबंटित किया गया है।

 फसल बीमा - 
प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से ऋण लेने वाले सदस्यों को व्यक्तिगत तथा फसल का बीमा किया जाता है। किसानों के लिए कृषक समूह बीमा योजना तथा फसल के लिए राष्ट्रीय कृषि फसल बीमा योजना लागू है। वर्ष 2009-10 में 7,60,477 किसानों ने 835.71 करोड़ रूपिये का फसल बीमा कराया था फलस्वरूप किसानों को 87.64 करोड़ की राशि क्षतिपूर्ति के रूप में प्रदान की गई।

इस प्रकार हम देखते है कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के पश्चात सहकारिता के माध्यम से सुविधाओं का विस्तार हुआ है। इससे किसानों मे तो खुशहाली आई ही है साथ ही साथ सहकारी आंदोलन को भी काफी गति मिली है।

सहकारिता  से मै सन 1983 से सीधे जुड़ा हूँ ,इन वर्षों में मैंने सहकारी आन्दोलन में अनेक उतार  चढाव देंखें है ,मै वृहत्ताकार कृषि साख समिति मानिकचौरी का 1983  से लगातार संचालक होने के साथ साथ जिला सहकारी केन्द्रीय  बैंक रायपुर का 1997 से 2004  तक संचालक रहा हूँ .   वर्तमान में मै अपेक्स बैंक छत्तीसगढ़ का डायरेक्टर तथा राष्ट्रीय सहकारी संघ नई दिल्ली का प्रतिनिधि हूँ. 
इस लेख को यहाँ भी पढ़ सकते है . अखबारों की कतरनें  यहाँ देंखें . 00357

21 अक्तूबर, 2010

अनाड़ी ब्लॉगर का शतकीय पोस्ट

ASHOK BAJAJ 
यह ग्राम चौपाल का शतकीय आलेख है, इस शतक को बनाने में हमें 150 दिन लगे. इस अवधि में 100 पोस्ट, 150 दिन, 37 समर्थक, 741 टिप्पणियां प्राप्त हुई. वैसे तो ब्लॉग हमारा बहुत दिनों से तैयार था लेकिन पहली पोस्ट हमने 22 मई 2010 को लगायी. जल सवर्धन पर एक लेख लिखा था जो अनेक अखबारों में छपा है उसे मैंने अपने ब्लॉग में लगा दिया था, उस पर ई गुरु राजीव का पहला कमेन्ट आया, दूसरा भी उन्हीं का था. उसके बाद पंकज  झा, जयराम “विप्लव”, ललित शर्मा, अजय कुमार और आशुतोष मिश्रा की टिप्पणी प्राप्त हुई . तब हमें टिप्पणियों के बारे में कुछ पता नहीं था. हमने 25  मई को एक पोस्ट लगा कर इन्हें धन्यवाद दिया.                                

जून 2010 में हमने 4 पोस्ट लगाये इस बीच पं.ललित शर्मा से मुलाकात हुई उन्होंने ब्लोगिंग के लिए प्रोत्साहित किया, तत्पश्चात हम जुलाई में सक्रिय हुए, जुलाई 2010 में - 21 पोस्ट , अगस्त 2010 में - 33 पोस्ट, सितम्बर 2010 में - 22 पोस्ट तथा अक्तूबर में अभी तक 17 पोस्ट लगायें हैं. सितम्बर में अधिकांश समय बाहर रहना पड़ा इसीलिए पोस्ट कम आये, वरना मेरा प्रयास रहता है कि हर रोज एक पोस्ट जरूर लगे. हमने पर्यावरण पर सर्वाधिक लेख लिखे है. इसके अलावा देश विदेश के ताजा घटनाक्रमों को स्थान दिया .धर्म, योग, राजनीति, संचार के अलावा स्वामी विवेकानंद, मुंशी प्रेमचंद, पं. दीनदयाल उपाध्याय, राजर्षि पुरूषोत्तमदास टंडन, पं. श्रीराम शर्मा, संत कबीर एवं महात्मा गांधी के प्रेरणा दायी विचारों को समाहित करने का प्रयास किया है. दो-चार छत्तीसगढ़ी एवं हिन्दी गीतों की पुष्प भी ब्लॉग में चढाई. नशाखोरी, महंगाई जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भी आपका ध्यान आकृष्ट किया इसके अलावा देश के मान-सम्मान से जुड़ी कुछ खबरों को भी आप तक पहुचानें का प्रयास करता रहा हूँ. पहले ashokbajaj99.blogspot.com था एक दिन ललित ने डोमेन कर http://www.ashokbajaj.com/ कर दिया तब से चिट्ठाजगत में सक्रियता में हमारी सीनियारिटी मारी गई. पहले हम सक्रियता क्रमांक 192 तक पहुँच चुके थे लेकिन अब हमारी सक्रियता क्रंमाक - 381 है.

ब्लोगिंग अपने विचारों एवं भावनाओं को प्रगट करने का सस्ता एवं सर्वोत्तम माध्यम है, हमने 150 दिनों में इसका खूब उपयोग किया. इसके माध्यम से देश -विदेश के अनेक नए मित्रों से परिचय भी हुआ,  ब्लोगिंग की दुनिया के अनेक सितारों के बारे में जानकारी मिली. ग्राम चौपाल को अधिकाधिक लोगों ने पसंद किया. ब्लॉग जगत के बाहर भी इसकी गूंज सुनाई पड़ी.

इसके चक्कर में मेरी दिनचर्या पर प्रतिकूल असर भी पड़ा है. दिन भर की व्यस्तता के बाद पोस्ट लिखने के लिए देर रात तक जागने की बुरी आदत जो पड़ने लगी है. सुबह 7 बजे के बजाय 9 बजे उठना पड़ता है. सुबह के अनेक काम प्रभावित होने लगे है. इस सबके बावजूद मैं आपके साथ मजबूती से खड़ा हूँ. आपका स्नेह भरा कमेन्ट मुझे ब्लोगिग मुझे ब्लॉगिंग के क्रीज पर जमे रहने के लिए प्रेरित करता है.

आभार ! धन्यवाद !! वंदेमातरम !!! 

आपका - अशोक बजाज रायपुर छत्तीसगढ़, (ashok bajaj raipur )