ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है * * * * नशा हे ख़राब झन पीहू शराब * * * * जल है तो कल है * * * * स्वच्छता, समानता, सदभाव, स्वालंबन एवं समृद्धि की ओर बढ़ता समाज * * * * ग्राम चौपाल में आपका स्वागत है

18 जुलाई, 2010

मनुष्य

मनुष्य   पद ,  पैसे   व   जाति   से  महान   नहीं  बनता ;  मनुष्य     महान  बनता  है  अपने   कर्म , व्यवहार  एवं  ज्ञान से      -  कबीर

17 जुलाई, 2010

भारत पाक वार्ता : शांति बनाम क्रांति

पिछले गुरुवार को भारत -पाकिस्तान वार्ता विफल हो गई ,भारत के विदेश मंत्री एस.एम् .कृष्णा बैरंग लौट आये .सिवाय अपमान के भारत को कुछ  हासिल नहीं हुआ.  ना जाने इस प्रकार की वार्ता कब तक चलती रहेगी ,कब तक भारत को अपमान का घूंट पीना पड़ेगा . पाकिस्तान के विदेश मंत्री   शाह महमूद कुरैशी  ने भारतीय विदेश मंत्री के खिलाफ  जो टिपण्णी  की है वह बहुत ही अमर्यादित एवं असहनीय है .इस अमर्यादित टिपण्णी के बाद प्रधान मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह  का यह कहना कि  सभी मुद्दों पर बातचीत होगी ,बड़ा आश्चर्य जनक है. गुरूवार की घटना के बाद पाकिस्तान से मर्यादा की आस करना व्यर्थ है. एक तरफ तो  भारत की शांति की नीति रही है तो दूसरी तरफ पाकिस्तान क्रांति चाहता है.   

प्रदूषण के खिलाफ जंग-- हरियर अभियान

            




 छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से 20 कि. मी. दूर रायपुर में आज एक लाख पौधे रोप कर नया इतिहास रचा है। छत्तीसगढ़ के गर्वनर शेखरदत्त, मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह, उनके मंत्रीमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी, किसान, मजदूर एवं स्कूली बच्चे सबने इस पावन कार्य पर होम दिया। चारो तरफ उत्साह और उमंग का माहौल दृष्टिगोचर हो रहा था । स्कूली बच्चो में काफी उत्साह दिखाई दे रहा था। नई राजधानी स्थल में पहली बार आने की खुशी भी थी । सबने पेड़ लगाये। कितना अदभुत दृश्य था। हजारो के संख्या में लोग पौधे रोप रहे थे ।

        हरियर अभियान का शुभारंभ नई राजधानी से किया गया । नई राजधानी हरी भरी एवं खूबसूरत होगी इसकी कल्पना की जा सकती है। एक साल बाद जब नई राजधानी में जब काम काज शुरू होगा तब तक ये पौधे अपना जड़ जमा लेगें । पर्यावरण को स्वच्छ और सुन्दर बनायेगें । आज का अभियान पर्यावरण की रक्षा के लिये आवश्यक था । नई पीढ़ी ने पेड़ के महत्ता  को आज समझा है । दरअसल हरियर अभियान प्रदुषण के खिलाफ एक जंग है इसमें सबको ‘शामिल होना चाहिए। प्रदूषण से देश को बचाना है । हर नागरिक को  शुद्ध वातावरण में जीने का अधिकार  है । प्रदूषण के खिलाफ इस जंग में जनता की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

खूबसूरत राजधानी का सपना :-
                    इस कार्यक्रम के बहाने बहुतों ने आज नई राजधानी का सिंहावलोकन किया । चारो तरफ सड़को का जाल बिछ रहा है । रायपुर,अभनपुर, आरंग व मंदिरहसौद से नई राजधानी को जोड़ने के लिए फोरलेन व सिक्सलेन की सड़को का निर्माण हो रहा है । मंत्रालय एवं अन्य कार्यालयीन भवनो का निर्माण व्यवस्थित ढंग से हो रहा है देश की सबसे खूबसूरत राजधानी बनाने का वर्तमान सरकार का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है ।

16 जुलाई, 2010

महंगाई डायन खाय जात है.........

इन दिनों फिल्म “ पिपली (लाईव) ” का यह गीत खूब चल पड़ा है ठीक वैसे ही जैसे कि पिछले एक दो वर्षो से “ सास गारी देवे ...... ” वाला गीत चल रहा है । फिल्म “ पिपली (लाईव) ” का भविष्य तो मै नही जानता शायद आक्टोपस पॅाल बाबा ही बता पाएंगे लेकिन इतना तय है कि यह गीत जरूर हीट हो जायेगा । गायक श्री रघुवीर यादव एवं उनकी मंडली को इस गीत से प्रसिध्दि तो मिल ही रही है। ऊपर से स्वर कोकिला लता मंगेश्कर ने इस गीत की तारीफ करके सोने में सुहागा कर दिया है।  

छत्तीसगढ़ के लोकगीत यहां की जान है
अपने ब्लॅाग में इस गीत का जिक्र करने के पीछे पहला कारण तो यह है कि यह गीत लोकधुनो पर आधारित है । हमारे देश में लोकगीतो का काफी महत्व है । वास्तव मे लोकधुनो में काफी मिठास होती है । प्रत्येक प्रांत या क्षेत्र में अलग अलग मौसम या तीज त्योहारो में बजाये या गाये जाने वाले लोकगीतो का अपना अलग ही आनंद है । “ महंगाई डायल खाय जात है......... “ भी लोकधुन पर आधारित है । गायक रघुवीर यादव व सहायक कलाकारो ने परम्परागत वाद्य यंत्रो में इस गाने को लय व ताल दिया है। सबसे बडी विशेषता यह है कि इस गीत में कही भी अत्याधुनिक वाद्य यंत्रो का इस्तेमाल नही किया गया है । ऐसे गीत पीढ़ी दर पीढ़ी बजाये जा रहे है, लेकिन उचित अवसर के अभाव में इन गीतो का धुन क्षेत्र से बाहर नही निकल पाता। फिल्म स्टॅार अमीर खान के द्वारा जैसे ही इसे प्लेटफार्म मिला यह हिट हो गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न तीज त्योहारो व संस्कारो में गाये जाने वाले गीतो को बार बार सुनने का जी करता है । छत्तीसगढ़ के लोकगीत यहां की जान है। समस्या यह है कि इन गीतो की मौलिकता कैसे बरकरार रहें । पाश्चात्य व बम्बईयां संगीत की खिचड़ी का दुष्प्रभाव छत्तीसगढ़ी लोक गीतो पर नही पड़ना चाहिए ।
 
आम आदमी की पीड़ा की अभिव्यक्ति 
इस चर्चा को ब्लाग में शामिल करने का दूसरा प्रमुख कारण यह है कि इस गीत में “ महंगाई ” जैसे ज्वलंत मुद्दे को शामिल किया गया है । वास्तव में यह गीत आम आदमी की पीड़ा की अभिव्यक्ति है । आज हर व्यक्ति मंहगाई से ग्रस्त है। निम्न व मघ्यम वर्ग के लोगो का तो बड़ा बूरा हाल है । इस गीत में आम आदमी की दशा का चिन्तन बहुत ही खूबसूरत ढंग से किया गया है।“ और आगे का कहूं, कहे नही जात है. महंगाई डायन खाय जात है ........... ”

कार्टून में महंगाई . . .