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27 फ़रवरी, 2013

राज्य के दस लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा बोनस

 
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह से आज दोपहर यहां विधानसभा परिसर स्थित उनके कार्यालय कक्ष में प्रदेश के सहकारिता क्षेत्र की संस्थाओं के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। उन्होंने मुख्यमंत्री को इस खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 में राज्य की एक हजार 333 सहकारी समितियों के दस लाख से अधिक सदस्य किसानों को धान पर 270 रूपए प्रति क्विंटल की दर से बोनस देने और इसके लिए आगामी वित्तीय वर्ष 2013-14 के बजट में एक हजार 750 कराड़ रूपए का प्रावधान किए जाने की घोषणा पर उन्हें धन्यवाद दिया और इसके लिए उनका अभिनंदन किया। प्रतिनिधि मण्डल ने कहा कि मुख्यमंत्री की इस घोषणा से प्रदेश के किसानों को एक हजार 923 करोड़ रूपए का बोनस मिलेगा, जो किसानों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। प्रतिनिधि मण्डल में छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी बैंक (अपेक्स बैंक) के अध्यक्ष श्री महावीर सिंह राठौर, राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) के अध्यक्ष श्री राधाकृष्ण् गुप्ता, अपेक्स बैंक संचालक मण्डल के सदस्य और राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष श्री अशोक बजाज, राज्य सहकारी भूमि विकास बैंक के अध्यक्ष श्री देवेन्द्र पाण्डेय, अपेक्स बैंक के संचालक श्री मिथिलेश दुबे तथा श्री रमाकांत दुबे सहित अन्य अनेक प्रतिनिधि शामिल थे।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित विधायक डॉ. शक्राजीत नायक को इस बात के लिए बधाई दी कि उन्हें धान पर बोनस के रूप में तीन लाख 27 हजार रूपए की धनराशि मिलने जा रही है। डॉ. नायक ने इसके लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री ने इस महीने की 23 तारीख को यहां विधानसभा में राज्य सरकार के आगामी वित्तीय वर्ष 2013-14 के बजट में किसानों को धान पर 270 रूपए प्रति क्विंटल की दर से खरीफ विपणन वर्ष 2012-13 का बोनस देने की घोषणा की है। प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री को बिलासपुर में आयोजित होने वाले सहकारिता सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि बिलासपुर संभाग के सभी जिलों की सहकारी समितियों के सदस्य किसान इस सम्मेलन में डॉ. रमन सिंह का अभिनन्दन करना चाहते हैं।DPR

26 जनवरी, 2013

गणतंत्र दिवस 2013 के कार्यक्रमों की झलकियाँ


प्रस्तुत है गणतंत्र दिवस 2013 के कार्यक्रमों की झलकियाँ -  


गणतंत्र दिवस 2013 : चौपाल में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : राज्य भंडारगृह निगम के प्रांतीय मुख्यालय में ध्वजारोहण.
गणतंत्र दिवस 2013 : राज्य भंडारगृह निगम के प्रांतीय मुख्यालय में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : सरस्वती शिशु मंदिर अभनपुर में बालमित्र पत्रिका का विमोचन.

गणतंत्र दिवस 2013 : सरस्वती शिशु मंदिर अभनपुर में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 :शा.कन्या उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर.

गणतंत्र दिवस 2013 :शा. बजरंग दास उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर में ध्वजारोहण.

गणतंत्र दिवस 2013 : श्री बजरंग दास शा. उच्चतर माध्यमिक शाला अभनपुर में गणतंत्र दिवस समारोह.
गणतंत्र दिवस 2013 : अभनपुर के मुख्य संयुक्त समारोह में ध्वजारोहण.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर के तत्वाधान में मुख्य समारोह में परेड की सलामी.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर द्वारा आयोजित नगर स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में स्कूली बच्चों की रंगारंग प्रस्तुति.
गणतंत्र दिवस 2013 : नगर पंचायत अभनपुर द्वारा आयोजित नगर स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह .


                गणतंत्र दिवस की आप सबको हार्दिक शुभकामनाएं !

12 जनवरी, 2013

स्वामी विवेकानंद के दस घोष वाक्य

स्वामी विवेकानंद जी की 150वी जयन्ती पर उन्हें नमन करते हुए, प्रस्तुत है उनके दस घोष वाक्य.

                                              

1   उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक मंजिल प्राप्त न हो जाये.

2   तूफान मचा दो तमाम संसार हिल उठता; क्या करूँ धीरे-धीरे अग्रसर होना पड़ रहा है. तूफ़ान मचा दो तूफ़ान !

3   जब तक जीना, तब तक सीखना' -- अनुभव ही जगत में सर्वश्रेष्ठ शिक्षक है.

4   पवित्रता, दृढ़ता तथा उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूँ.

5   ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है.
 

6   जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है तब वह वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है.

7   आध्यात्मिक दृष्टि से विकसित हो चुकने पर धर्मसंघ में बने रहना अवांछनीय है; उससे बाहर निकलकर स्वाधीनता की मुक्त वायु में जीवन व्यतीत करो.
 

8   हमारी नैतिक प्रकृति जितनी उन्नत होती है, उतना ही उच्च हमारा प्रत्यक्ष अनुभव होता है, और उतनी ही हमारी इच्छा शक्ति अधिक बलवती होती है.

9   लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्मी तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहान्त आज हो या एक युग मे, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो.
 

10  तुम अपनी अंत:स्थ आत्मा को छोड़ किसी और के सामने सिर मत झुकाओ; जब तक तुम यह अनुभव नहीं करते कि तुम स्वयं देवों के देव हो, तब तक तुम मुक्त नहीं हो सकते.
                                                                                                                       

26 दिसंबर, 2012

छत्तीसगढ़: एक अटल-प्रतिज्ञा जो पूरी हुई

पूर्व प्रधानमंत्री मान. अटल बिहारी वाजपेयी के 89 वें जन्मदिवस पर विशेष लेख

    ह दृश्य अभी भी ऑंखो से ओझल नहीं हो पाया है जब 31 अक्टूबर 2000 को घड़ी की सुई ने रात के 12 बजने का संकेत दिया तो चारो तरफ खुशी  और उल्लास का वातावरण बन गया। लोग मस्ती में   झूमते- नाचते एक दूसरे को बधाइयॉं दे रहे थे. प्रधानमंत्री माननीय अटल बिहारी वाजपेयी की चारों तरफ जय-जयकार हो रही थी. घर घर में दीपमल्लिका सजा कर रोशनी की गई थी. आतिश बाजी का नजारा देखते ही बनता था. पहली सरकार कांग्रेस की बननी थी सो कुर्सी के लिए उठापटक का दौर बंद कमरे में चल रहा था. लोग एक तरफ नए राज्य निर्माण की खुशी  मना रहे थे तो दूसरी तरफ कौन बनेगा प्रथम  मुख्यमंत्री इस जिज्ञाषा में अपना ध्यान राजनीतिक गलियारों की ओर लगायें थे.

    राज्य का गठन करना कोई हंसी खेल तो था नहीं। कई वर्षो से लोग आवाज उठा रहे थे अनेक तरह से आंदोलन भी करते रहे लेकिन राज्य का निर्माण नहीं हो पाया था। इस बीच प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सन 1998 में सप्रेशाला रायपुर के मैदान में एक अटल प्रतिज्ञा की, कि यदि आप लोकसभा की 11 में से 11 सीटो में भाजपा को जितायेंगे तो मैं तुम्हे छत्तीसगढ़ राज्य दूंगा। लोकसभा चुनाव का परिणाम आया। भाजपा को 11 में सें 8 सीटे मिली लेकिन केंद्र में अटल सरकार फिर से बनी। प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने अपनी प्रतिज्ञा के अनुरूप राज्य निर्माण के लिए पहले ही दिन से प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। मध्यप्रदेश राज्य पुर्निर्माण विधेयक 2000 को 25 जुलाई 2000 में लोकसभा में पेश किया गया। इसी दिन बाकी दोनो राज्यो के विधेयक भी पेश हुए। 31 जुलाई 2000 को लोकसभा में और 9 अगस्त को राज्य सभा में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रस्ताव पर मुहर लगी। 25 अगस्त को राष्ट्रपति ने इसे मंदूरी दे दी। 4 सिंतबर 2000 को भारत सरकार के राजपत्र में प्रकाशन के बाद 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ देश के 26 वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया और एक अटल-प्रतिज्ञा पूरी हुई।

    छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पहले हम मध्यप्रदेश में थे। मध्यप्रदेश का निर्माण सन 1956 में  1 नवम्बर को ही हुआ था। हम 1 नवम्बर 1956 से 31 अक्टूबर 2000 तक यानी 44 वर्षो तक मध्यप्रदेश के निवासी थे तब हमारी राजधानी भोपाल थी। इसके पूर्व वर्तमान छत्तीसगढ़ का हिस्सा सेन्ट्रल प्रोविंस एंड बेरार (सी.पी.एंड बेरार) में था तब हमारी राजधानी नागपुर थी। इस प्रकार हमें पहले सी.पी.एंड बेरार, तत्पश्चात  मध्यप्रदेश और अब छत्तीसगढ़ के निवासी है। वर्तमान छत्तीसगढ़ में जिन लोगो का जन्म 1 नवम्बर 1956 को या इससे पूर्व हुआ वे तीन राज्यो में रहने का सुख प्राप्त कर चुके है।

    परंतु छत्तीसगढ़ राज्य में रहने का अपना अलग ही सुख है। अगर हम भौतिक विकास की बात करे तो छत्तीसगढ़ कें संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि हमने 12 वर्षो से लंबी छलांग लगाई है। मै यह बात इसीलिए लिख रहा हू  क्योंकि हम 1 नवम्बर 2000 के पहले देश की मुख्य धारा से काफी अलग थे। गरीबी, बेकारी, भूखमरी, अराजकता और पिछड़ापन हमें विरासत में मिला। छत्तीसगढ़ इन बारह वर्षो मे गरीबी, बेकारी, भुखमरी, अराजकता और पिछड़ापन के खिलाफ संघर्ष करके आज ऐसे मुकाम पर खड़ा है जहा देखकर अन्य विकासशील  राज्यों का ईर्ष्या हो सकती है। इस नवोदित राज्य को पलायन व पिछड़ापन से मुक्ति पाने में 12 वर्ष लग गये। सरकार की जनकल्याणकारी योजनांए से नगर, गांव व कस्बो की तकदीर व तस्वीर तेजी बदल रही है। छत्तीसगढ़ की मूल आत्मा गांव में बसी हुई है, सरकार के लिए गांवो का विकास एक बहुत बड़ी चुनौती थी लेकिन इस  काल - खण्ड में विकास कार्यो के सम्मपन्न हो जाने से गांव की नई तस्वीर उभरी है। गांव के किसानों को सिंचाई, बिजली, सड़क, पेयजल, शिक्षा व स्वास्थ जैसी मूलभूत सेवांए प्राथमिकता के आधार पर मुहैया कराई गई है। हमें याद है कि पहले गॉंवो में ग्राम पंचायते थी लेकिन पंचायत भवन नहीं थे, शालाएं थी लेकिन शाला भवन नही थे, सड़के तो नही के बराबर थी, पेयजल की सुविधा भी नाजुक थी लेकिन आज गांव की तस्वीर बन चुकी है। विकास कार्यो के नाम पर पंचायत भवन, शाला भवन, आंगनबाड़ी भवन, मंगल भवन, सामुदायिक भवन, उपस्वास्थय केन्द्र, निर्मलाघाट, मुक्तिधाम जैसे अधोसरंचना के कार्य गांव-गांव में दृष्टिगोचर हो रहे है। अपवाद स्वरूप ही ऐसे गांव बचें होंगे जहॉं बारहमासी सड़को की सुविधा ना हो, गांवो की सड़को से जोड़ने से गांव व शहर की दूरी कम हुई है। अनेक गंभीर चुनौतियों के बावजूद ग्रामीण विकास के मामले में छत्तीसगढ़ ने उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ को भूखमरी से मुक्त कराने के लिए डॉ रमन सिंह की सरकार ने बी.पी.एल. परिवारों को 1 रूपये/2 रूपये किलों में प्रतिमाह 35 किलो चावल देने का एतिहासिक निर्णय लिया जो देश भर में अनुकरणीय बन गया है। किसानो को 1 प्रतिशत ब्याज दर पर फसल ऋण प्राप्त हो रहा है। स्कूली बच्चों को मुफ्त में  पाठ्य पुस्तक उपलब्ध कराई जा रही है। वनोपज संग्रहणकर्ता मजदूरों को चरण - पादुकांए दी जा रही है। अगर यह संभव हो पाया तो केवल इसीलिए कि माननीय अटलबिहारी वाजपेयी ने एक झटके में छत्तीसगढ़ का निर्माण किया, छत्तीसगढ़ की जनता उनका सदैव ऋणी रहेगी।