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09 जून, 2011

बेचारी पुलिस

पुलिस को ‘‘बेचारी पुलिस’’कहने से उन लोगों को आपत्ति हो सकती है जो पुलिस की लाचारी को नही समझते। यह विडंबना ही है कि जिस व्यक्ति को कभी वे मार मार कर भुरता बनाने का काम करते है उसी व्यक्ति को समय आने पर सलाम ठोकना पड़ता है। दिल्ली पुलिस ने विगत दिनों बाबा रामदेव के अनशन स्थल रामलीला मैदान में जो कुछ किया वह दुनिया ने देख लिया । बिना वारंट ,बिना सूचना और बिना चेतावनी के आधी रात को रामलीला मैदान में हमला बोल दिया और देखते ही देखते बाबा रामदेव एवं समर्थकों की ऐसी हालत बना दी कि जिन्दगी भर वे नहीं भूलेंगें । जहाँ गीत और भजन हो रहे थे वहां चीख और चीत्कार होने लगा । पुलिस ने महिलाओं ,  बच्चों एवं बूढों को भी नहीं बख्शा । यहाँ तक कि बाबा रामदेव को वे पकड़ कर ले गए ,  जब पुलिस के चंगुल से छूटे तब वे औरत के लिबास में मिले ।

 1974 में भी ऐसा ही कुछ हुआ था , जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने समग्र क्रांति का नारा देकर देश की तरूणाई को आंदोलित कर दिया था। तब भी आंदोलन कारियों के साथ पुलिस ने ऐसा ही सलूक किया था।25  जून 1975 की आधीरात को देश भर के विपक्षी नेताओं को पकड़ पकड़ कर मीसा में बंद कर दिया था। 19 महीने बाद अधिकांश मीसाबंदी सत्ता के अंग बन गये।अब बेचारी पुलिस उन्हें सैलूट ना मारे तो क्या करे ? सैलूट मारना उनकी मजबूरी हो गई थी सो जिन लोगों पर वे पहले लाठियां बरसा रहे थे उन्ही लोगों को सैलूट मारने लगे। कोई कुरेद देता तो कहते थे क्या करें जनाब हमें तो नौकरी करनी है अतः बाँस का आर्डर बजाना पड़ता है ।

1977 के  लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने वाले समग्र क्रांति के नायक बाबू जयप्रकाश नारायण ने अपने आपको कुर्सी से दूर रखा तथा किंग मेकर के रूप अपनी पहचान बनाई । मुझे याद है जनता शासन काल में जयप्रकाश बाबू जब-जब दिल्ली आते थे तब तब वहां की पुलिस पलक पावड़े बिछाए उनका घंटों इंतजार करती थी । बाबू जयप्रकाश पर कुछ महीनें पहले डंडा बरसाने  वाली पुलिस के हाथों में फूलों का गुलदस्ता देख कर उनकी दशा पर तरस आता था ।

ये भारत है , यहां की जनता का ट्रेंड पल पल बदलता है। दिल्ली की पुलिस जिसने बाबा रामदेव को आधी रात को दिल्ली से तड़ीपार किया तथा उन्हें 15 दिन तक दिल्ली आने से प्रतिबंधित किया,कहीं वही बाबा भविष्य में यदि " किंग मेकर " बन गए तो बेचारी दिल्ली की पुलिस की लाचारी आप समझ सकते है क्या होगी ?

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5 टिप्‍पणियां:

  1. आदरणीय अशोक बजाज जी...आपका लेखन सटीक लगा...पुलिस तो बेचारी ही है...
    दरअसल मैं भी बाबा रामदेव के आन्दोलन में शामिल था, मैंने अपने शरीर पर तीन लाठियां खाई हैं...मैंने उस रात की मेरी आँखों देखी कहानी अपने ब्लॉग पर लिखी है...कृपया एक दृष्टि डालें...
    http://pndiwasgaur.blogspot.com/2011/06/blog-post_07.html

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  2. अंग्रेजों के जमाने की पुलिस है।

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  3. बड़ी समस्या है यह तो पुलिस विभाग के लिये।

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  4. वंदे मातरम और भारत माता की जय
    बोलने वालों पर ऐसा भयानक अत्याचार ?
    फिर तो 'जय काला धन' और 'जय भ्रष्टाचार'
    बोलने वालों का ही होगा हमेशा यहाँ सत्कार !

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  5. पुलिस तो हर परिस्थिति में कर्तव्‍य निर्वाह करती है, उसके लिए व्‍याख्‍या हमारी होती है.

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